विनाश पर आस्था की विजय की अमर गाथा, गजनवी के आक्रमण से पीएम मोदी के आधुनिक विजन तक की यात्रा

विनाश पर आस्था की विजय की अमर गाथा, गजनवी के आक्रमण से पीएम मोदी के आधुनिक विजन तक की यात्रा
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गांधीनगर। भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सदियों से अटूट श्रद्धा और निरंतर पुनर्निर्माण की जीवंत गाथा रहा है। बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माने जाने वाले इस पवित्र धाम ने हर दौर में भारतीय अस्मिता और आत्मगौरव की रक्षा की है।

प्राचीन काल में सोमनाथ की समृद्धि और भव्यता ही आक्रांताओं के आकर्षण का कारण बनी। इतिहास के अनुसार 1025-26 ईस्वी में गजनी के सुल्तान महमूद गजनवी ने लंबा और कठिन मरुस्थलीय मार्ग तय कर सोमनाथ पर आक्रमण किया। उस समय यह क्षेत्र एक समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र था। स्थानीय शासकों और जनता ने साहसपूर्वक प्रतिरोध किया, लेकिन आक्रमण में मंदिर को भारी क्षति पहुंची और संपत्ति लूट ली गई। इसके बावजूद आक्रांता लोगों की आस्था को समाप्त नहीं कर सका। उसके लौटने के बाद चालुक्य वंश के शासकों ने मंदिर का पुनर्निर्माण कर सांस्कृतिक चेतना को फिर से जीवित किया।

स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़ा विषय बन गया। सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1947 में मंदिर को उसके प्राचीन गौरव के साथ पुनर्स्थापित करने का संकल्प लिया। उनके मार्गदर्शन में पारंपरिक चालुक्य स्थापत्य शैली में मंदिर का निर्माण हुआ। वर्ष 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने मंदिर का लोकार्पण करते हुए इसे भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बताया।

हाल के वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के श्री सोमनाथ ट्रस्ट का अध्यक्ष बनने के बाद मंदिर के विकास को नई दिशा मिली है। आधुनिक दृष्टिकोण के साथ श्रद्धालुओं की सुविधाओं और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। डिजिटल दर्शन व्यवस्था, बेहतर प्रबंधन और आधारभूत ढांचे के विस्तार से सोमनाथ को विश्व स्तरीय धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया गया है।

समुद्र तट पर विकसित पदयात्री मार्ग श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बना है। वहीं आधुनिक तकनीक के माध्यम से इतिहास को जीवंत रखने के लिए लाइट और साउंड शो की शुरुआत की गई है। समुद्री वातावरण से होने वाले क्षरण से मंदिर की रक्षा के लिए विशेष संरक्षण उपाय भी लागू किए गए हैं।

आज सोमनाथ मंदिर परंपरा और आधुनिकता के संतुलन का सशक्त उदाहरण बन चुका है। यह स्थल न केवल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, बल्कि भारतीय संस्कृति की निरंतरता और राष्ट्रीय स्वाभिमान का सजीव प्रतीक बनकर विश्व मंच पर अपनी पहचान बनाए हुए है।

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