क्या बिहार मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण के परिणाम दूरगामी? राहुल गांधी की राजनीति का दांव...

बिहार क्या बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण के दूरगामी परिणाम? राहुल की राजनीति का बड़ा दांव है मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। वे बिहार में तेजस्वी और लालू यादव के साथ मिलकर वोट अधिकार यात्रा निकाल रहे हैं तो इधर विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के विरुद्ध महाभियोग प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहा है। राहुल गांधी, कांग्रेस और विपक्ष की इस तैयारी से एक बात साफ है कि वे जानते हैं कि इस मुद्दे का व्यापक असर होने की संभावना है। सर के साये में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम भी दूरगामी असर डालने वाले होंगे।
राहुल गांधी ने इसके पहले राफेल विमानों की खरीद में घोटाला होने का मुद्दा उठाया और 'चौकीदार चोर है' का नारा दिया। लेकिन जनता ने उनके इस दावे को स्वीकार नहीं किया और मोदी या केंद्र सरकार इस मुद्दे के बाद ज्यादा मजबूत होकर उभरे। उलटे राहुल गांधी को ही इस बयान के लिए माफी मांगनी पड़ी। इसी तरह राहुल ने महात्मा गांधी की हत्या में आरएसएस की भूमिका और वीर सावरकर के मुद्दे पर भी आक्रामक रुख अपनाया, लेकिन अंततः उन्हें इसके लिए भी माफी मांगनी पड़ी। मोदी सरनेम पर विवादित टिप्पणी करके भी वे फंस चुके हैं।
हालांकि, पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान 'संविधान पर खतरा' होने के उनके मुद्दे ने काफी असर दिखाया और भाजपा मोदी के नेतृत्व में तीसरी बार अपने दम पर सरकार बनाने से चूक गई। लेकिन इसके बाद भी यह समझना होगा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में उनका यह अभियान मोदी को सत्ता में आने से नहीं रोक सका।
यदि सफल रहा राहुल गांधी का मुद्दा
यदि राहुल गांधी मतदाता सूची पर पैदा हुए विवाद के सहारे कांग्रेस-राजद को बिहार में जीत दिलाने में सफल रहते हैं तो इससे उनकी स्वीकार्यता तेजी से बढ़ेगी। यह पूरे देश में उनकी संघर्ष करने वाले नेता के रूप में छवि को स्थापित करेगा। इसका असर केवल बिहार तक सीमित नहीं रहेगा। यदि वे अपने गठबंधन को जीत दिलाने में सफल रहते हैं तो इससे कांग्रेस पूरे देश में मजबूत हो जाएगी। यूपी में समाजवादी पार्टी से वह बेहतर मोलभाव कर सकेगी और उसे यूपी में ज्यादा सफलता हासिल हो सकती है। यूपी के बाद इसका असर पश्चिम बंगाल और 2029 के लोकसभा चुनावों तक भी हो सकता है।
लेकिन यदि फेल हुए तो...
लेकिन यदि मतदाता सूची के मुद्दे को बिहार की जनता ने स्वीकार नहीं किया और बीजेपी-जदयू फिर सरकार बनाने में सफल रहे तो इससे राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठेंगे। सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष के दल भी राहुल गांधी के नेतृत्व को देश-प्रदेश के स्तर पर स्वीकार करने से बचने लगेंगे। यूपी में कांग्रेस की मोलभाव क्षमता प्रभावित होगी और 2029 को लेकर कांग्रेस को अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा।
बीजेपी जीती तो यूपी पर होगी मजबूत दावेदारी
लोकसभा चुनाव में संविधान बदलने के मुद्दे के सहारे कांग्रेस-सपा ने भाजपा को कमजोर करने में सफलता हासिल कर ली। अभी भी पीडीए मुद्दे को धार दे रहे अखिलेश यादव मानकर चल रहे हैं कि यदि लोकसभा चुनाव की हवा को वे थोड़ा भी धार दे पाए तो यूपी का चुनाव इस बार उनके पक्ष में बेहतर परिणाम ला सकता है। लेकिन यदि बिहार में भाजपा-जदयू जीत हासिल करने में सफल रहते हैं तो इससे यूपी में भगवा दल की दावेदारी मजबूत हो जाएगी। और यूपी में मजबूत होने का असर 2029 तक देखने को मिल सकता है।
देश की राजनीति पर होगा असर
मतदाता सूची का विवाद पर सत्ता पक्ष-विपक्ष के अपने-अपने दावे हैं। यदि भाजपा-जदयू ने बड़ी जीत हासिल की तो इससे यह मुद्दा दफन हो सकता है और चुनाव आयोग पूरे देश में इसे पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ा सकता है। लेकिन यदि एनडीए बिहार चुनाव हारती है तो कांग्रेस-राहुल गांधी इसी मुद्दे के सहारे पूरे देश में भाजपा-मोदी पर भारी पड़ने का प्रयास करेंगे। यानी बिहार चुनाव में केवल एक प्रदेश की बात भर सीमित नहीं है। कहीं न कहीं यह पूरे देश की राजनीति को प्रभावित करने वाला चुनाव हो सकता है। संभवतः यही कारण है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष ने बिहार में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
