कांग्रेस ने EC पर बोला हमला, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उठाए सवाल

नई दिल्ली कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश की 'खुलेआम अवहेलना' करने के लिए 'नाम लेकर शर्मिंदा किया जाना चाहिए', जिसमें आधार कार्ड को पहचान पत्र के रूप में स्वीकार करने की बात कही गई थी। कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि वह चुनाव आयोग के खिलाफ होने के बावजूद इस बार का चुनाव लड़ रही है।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर सीधा निशाना
मुख्य विपक्षी पार्टी ने यह भी कहा कि इतिहास मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और उनके नेतृत्व वाले संस्थान को माफ नहीं करेगा। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की खुली अवहेलना करने के लिए नाम लेकर शर्मिंदा किया जाना चाहिए।
'सुप्रीम कोर्ट ने तीसरी बार दोहराया आदेश'
रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा, आज सुप्रीम कोर्ट ने तीसरी बार यह बात दोहराई कि आधार को मतदाता पंजीकरण के लिए मान्य पहचान पत्र के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि वैध मतदाताओं का पंजीकरण कठिन बनाने के लिए चुनाव आयोग बार-बार जानबूझकर रुकावटें डाल रहा है। उन्होंने कहा, आयोग ने राजनीतिक दलों की ओर से नियुक्त ब्लॉक स्तर के एजेंट (बीएलए) को मान्यता नहीं दी, आधार कार्ड को स्वीकार नहीं किया, और अधिकारियों को केवल वही दस्तावेज स्वीकार करने के लिए नोटिस भेजे, जो आयोग ने निर्धारित किए हैं।
सीईसी को माफ नहीं करेगा इतिहास: कांग्रेस
कांग्रेस नेता ने कहा, ध्यान रखिए यह पूरी गड़बड़ी खुद चुनाव आयोग ने की हुई है। चुनाव के इतने करीब विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की मांग जी2 (मुख्य चुनाव आयुक्त) के अलावा किसी और ने नहीं की थी। इसे इतनी लापरवाही से अंजाम देने की मांग भी सिर्फ जी2 ने की थी कि अब सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप कर मूलभूत जांच-पड़ताल सुनिश्चित करनी पड़ी है। लंबी सोशल मीडिया पोस्ट में जयराम रमेश ने कहा, कोई भ्रम न रखें, हम यह चुनाव सरकार के खिलाफ और चुनाव आयोग के खिलाफ होने के बावजूद लड़ रहे हैं। इन मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और जिस संस्था का वह नेतृत्व कर रहे हैं, उन्हें इतिहास माफ नहीं करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिया?
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि बिहार में मतदाता सूची के लिए जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में आधार कार्ड को 12वें वैकल्पिक पहचान पत्र के रूप में स्वीकार किया जाए। फिलहाल, बिहार एसआईआर में 11 प्रकार के दस्तावेज मतदाता पंजीकरण के लिए मान्य हैं, जिनके साथ नागरिकों को अपने फॉर्म जमा करने होते हैं।
