जयशंकर के बयान पर कांग्रेस का पलटवार, जयराम रमेश बोले- गले लगाने वाली कूटनीति पूरी तरह फेल

नई दिल्ली पश्चिम एशिया संकट को लेकर हुई सर्वदलीय बैठक के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर के पाकिस्तान को दलाल देश कहने वाले बयान पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने इस बयान को आधार बनाकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है और कहा है कि गले लगाने वाली कूटनीति पूरी तरह फेल हो चुकी है। कांग्रेस का आरोप है कि आज हालात ऐसे हो गए हैं कि एक कमजोर देश भी दलाल बनने की स्थिति में दिख रहा है, जो भारत की विदेश नीति पर सवाल खड़े करता है।
सरकार की ओर से बैठक में कहा गया था कि पाकिस्तान की मध्यस्थता कोई नई बात नहीं है और वह 1981 से अमेरिका के लिए ऐसी भूमिका निभाता रहा है। विदेश मंत्री जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत दलाल देश नहीं है और अपनी स्वतंत्र नीति पर चलता है। सरकार ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप से कहा है कि इस्राइल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध जल्द खत्म होना चाहिए क्योंकि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।
जयराम रमेश ने क्या कहा?
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि मोदी सरकार की गले लगाने वाली कूटनीति विफल रही है। उनका कहना है कि पहले जिन देशों के साथ नजदीकी दिखाई गई, उसी के बावजूद आज पाकिस्तान जैसे देश को मध्यस्थता का मौका मिल रहा है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी सवाल उठाया कि जब भारत ने रूस-यूक्रेन के बीच मध्यस्थता की कोशिश की थी, तब क्या भारत ब्रोकर देश था। उन्होंने इसे सरकार की दोहरी सोच बताया।
क्या भारत पश्चिम एशिया मुद्दे पर सक्रिय है या नहीं?
विपक्ष ने आरोप लगाया कि भारत इस मुद्दे पर पूरी तरह मुखर नहीं है और प्रतिक्रिया कमजोर है। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भारत लगातार अपनी बात रख रहा है और हालात पर नजर बनाए हुए है। सरकार ने कहा कि उसकी प्राथमिकता खाड़ी क्षेत्र में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा और देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है।
विपक्ष की क्या मांग है?
कांग्रेस के तारिक अनवर ने कहा कि पाकिस्तान सक्रिय भूमिका निभा रहा है, जबकि भारत मूक दर्शक बना हुआ है। विपक्ष ने सरकार के जवाबों को असंतोषजनक बताते हुए लोकसभा और राज्यसभा में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की है। सरकार ने कहा कि वह हर स्थिति के लिए तैयार है और देशहित में जरूरी कदम उठा रही है।
