गुजरात के मंत्री खाबड़ के बेटे को कोर्ट ने दी नियमित जमानत, मनरेगा घोटाले में हुआ था गिरफ्तार

गुजरात के मंत्री बच्चूभाई खाबड़ के बेटे बलवंत सिंह खाबड़ को मंगलवार को दाहोद जिले की एक अदालत ने कुछ शर्तों के साथ नियमित जमानत दे दी है। उसके खिलाफ दाहोद 'बी' डिवीजन पुलिस स्टेशन में ग्रामीण रोजगार योजना मनरेगा में 71 करोड़ रुपये के घोटाले के सिलसिले में प्राथिमकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने उसे मई में गिरफ्तार किया था।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप सिंह डोडिया ने भाजपा मंत्री के बेटे को 15,000 रुपये के जमानती बॉन्ड पर नियमित जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने आरोपी पर शर्तें लगाईं, जो वर्तमान में दाहोद उप-जेल में बंद है, और उसे बिना अनुमति के भारत नहीं छोड़ने और सात दिनों के भीतर अपना पासपोर्ट जमा करने को कहा गया है।
जांच में सहयोग करने तक हिरासत में रखने की जरूरत नहीं
अदालत ने कहा कि जब तक वह जांच में सहयोग करता है, तब तक उसे हिरासत में रखने की कोई आवश्यकता नहीं है। न्यायाधीश ने मामले में उसकी कथित भूमिका, दोषी पाए जाने पर उसे मिलने वाली सजा की मात्रा और इस तथ्य को भी ध्यान में रखा कि मामले की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) अदालत द्वारा की जाएगी।
डीआरडीए ने घोटाले का किया था पर्दाफाश
जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (डीआरडीए) ने 71 करोड़ रुपये के मनरेगा घोटाले का पर्दाफाश किया था। जिसके बाद दाहोद पुलिस ने सरकारी कर्मचारियों समेंत कुछ लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और विश्वासघात की प्राथमिकी दर्ज दर्ज की थी। बाद में पुलिस ने बलवंत सिंह खाबड़ को उसके भाई किरण के साथ गिरफ्तार कर लिया था।
2021 से 24 के बीच सौंपे गए काम को नहीं किया पूरा
पुलिस के अनुसार, बलवंत सिंह और किरण खाबड़, दाहोद जिले के देवगढ़ बारिया और धनपुर तालुका में फर्जी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) परियोजनाओं में शामिल एजेंसियों के मालिक हैं। एफआईआर के अनुसार, दोनों ने 2021 और 2024 के बीच सौंपे गए काम को पूरा नहीं किया और न ही आवश्यक सामग्री की आपूर्ति की, लेकिन फर्जी कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र और जाली दस्तावेज जमा करके भुगतान का दावा किया।
योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को 100 दिन काम की गारंटी देना
केंद्र प्रायोजित योजना का उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों की गारंटीकृत मजदूरी रोजगार प्रदान करके आजीविका सुरक्षा को बढ़ाना है, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल मैनुअल काम करने के लिए स्वेच्छा से काम करते हैं।
