ईडी छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी की मौजूदगी पर राज्यपाल का सख्त रुख, लोक सेवक को काम से रोकना अपराध

ईडी छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी की मौजूदगी पर राज्यपाल का सख्त रुख, लोक सेवक को काम से रोकना अपराध
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कोलकाता पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय नया संवैधानिक विवाद खड़ा हो गया, जब प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मौजूदगी और कार्रवाई को लेकर सवाल उठे। राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने इसे गंभीर संवैधानिक मुद्दा बताते हुए कहा है कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से संविधान के पालन की अपेक्षा होती है।

कोलकाता में आई-पैक प्रमुख प्रतीक जैन के आवास और कार्यालय पर ईडी की छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के वहां पहुंचने को लेकर भाजपा और तृणमूल कांग्रेस आमने-सामने हैं। इस बीच राज्यपाल ने कहा कि किसी लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकना अपराध है और डराना-धमकाना उससे भी गंभीर अपराध माना जाता है।

राज्यपाल की टिप्पणी

राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं एक संवैधानिक प्राधिकारी हैं। यदि आरोप सही हैं, तो उनकी कार्रवाई से मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो सकता है। उन्होंने बताया कि वह संवैधानिक विशेषज्ञों से सलाह ले रहे हैं, लेकिन मामला अदालत में लंबित होने के कारण किसी तरह का फैसला या टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।

ईडी का आरोप और जांच का दायरा

प्रवर्तन निदेशालय ने आरोप लगाया है कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पुलिस अधिकारियों के साथ प्रतीक जैन के आवास में दाखिल हुईं और अहम दस्तावेज तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अपने साथ ले गईं। ईडी के मुताबिक इससे जांच में बाधा पहुंची। एजेंसी ने कहा कि यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कोयला तस्करी मामले की जांच का हिस्सा है और किसी राजनीतिक दल को निशाना नहीं बनाया गया है।

तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा केंद्र की एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है और पार्टी की चुनावी रणनीति से जुड़े दस्तावेज जब्त करने की कोशिश की गई। पार्टी ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया। वहीं ईडी ने स्पष्ट किया कि यह जांच सबूतों के आधार पर है और कानून के दायरे में की जा रही है।

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