भारतीय रेलवे का 'ग्रीन' धमाका:: देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद पहुंची; किराया मात्र ₹5, हवाई जहाज जैसी तकनीक

जींद/सोनीपत। भारतीय रेलवे पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी तकनीक के मेल से एक नया इतिहास रचने को तैयार है। देश की पहली 'हाइड्रोजन पावर्ड' ट्रेन हरियाणा के जींद जंक्शन पहुंच चुकी है। शून्य प्रदूषण वाली यह ट्रेन जींद-सोनीपत रूट पर दौड़ेगी। चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में तैयार यह ट्रेन न केवल धुएं और शोर से मुक्त होगी, बल्कि यात्रियों के समय और पैसे की भी भारी बचत करेगी।
26 जनवरी से ट्रायल की उम्मीद, सुपरफास्ट होगा सफर
रेलवे सूत्रों के अनुसार, इस अत्याधुनिक ट्रेन का ट्रायल रन 26 जनवरी 2026 (गणतंत्र दिवस) से शुरू होने की प्रबल संभावना है, हालांकि कुछ रिपोर्ट्स 20-21 जनवरी की तैयारी का भी संकेत दे रही हैं।
दूरी: जींद से सोनीपत के बीच करीब 90 किमी का सफर।
समय की बचत: वर्तमान में डीएमयू ट्रेन इस दूरी को तय करने में 2 घंटे लेती है, जबकि हाइड्रोजन ट्रेन इसे 60 मिनट से भी कम समय में पूरा करेगी।
रूट: जींद सिटी, पांडु पिंडारा, भंभेवा, गोहाना और मोहाना जैसे प्रमुख स्टेशनों पर इसके स्टॉपेज होंगे।आम आदमी की जेब पर नहीं पड़ेगा बोझ: न्यूनतम किराया ₹5इस हाई-टेक ट्रेन की सबसे बड़ी खूबी इसका किफायती किराया है। रेलवे ने इसे दैनिक यात्रियों, छात्रों और नौकरीपेशा वर्ग को ध्यान में रखकर तैयार किया है:
न्यूनतम किराया: ₹5 (छोटे स्टेशनों के लिए)।
अधिकतम किराया: ₹25 (जींद से सोनीपत तक के पूरे सफर के लिए)।
दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन: पानी से बनेगी बिजली
यह ट्रेन 'मेक इन इंडिया' और 'ग्रीन इंडिया' मिशन का बेहतरीन उदाहरण है।
तकनीक: यह इलेक्ट्रोकेमिकल प्रक्रिया पर आधारित है, जो हाइड्रोजन का उपयोग कर बिजली पैदा करती है। ट्रेन से धुएं के बजाय केवल भाप और पानी निकलेगा।
क्षमता: 2400 किलोवाट क्षमता वाली इस ट्रेन में 8-10 कोच होंगे, जो एक बार में करीब 2600 यात्रियों को ले जा सकेंगे।
सुविधाएं: ऑटोमेटिक दरवाजे, एयर कंडीशनिंग, डिजिटल डिस्प्ले और 140 किमी/घंटा तक की ऑपरेशनल स्पीड।
हाइड्रोजन प्लांट: ट्रेन को ईंधन देने के लिए जींद में देश का सबसे बड़ा हाइड्रोजन प्लांट स्थापित किया गया है, जो सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रोलिसिस की मदद से गैस तैयार करेगा।
लागत और सहयोग
करीब ₹89 करोड़ की लागत से तैयार यह प्रोजेक्ट RDSO और स्पेनिश कंपनी 'ग्रीन एच' के तकनीकी सहयोग से पूरा हुआ है। डीजल इंजन की तुलना में यह ट्रेन न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि लंबी अवधि में रेलवे के ईंधन खर्च को भी कम करेगी।
"यह ट्रेन भारतीय इंजीनियरिंग का गौरव है। बिना किसी शोर और प्रदूषण के 140 की रफ्तार से दौड़ना रेलवे के भविष्य को बदल देगा।" — रेलवे अधिकारी
