संसद में उठा फारूक अब्दुल्ला पर फायरिंग का मुद्दा, खरगे ने उठाए सवाल, नड्डा ने विपक्ष को घेरा

नई दिल्ली। नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर हुए जानलेवा हमले का मुद्दा संसद में उठा। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाए कि फारूक अब्दुल्ला की सुरक्षा खतरे हैं और जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं दिया जाना इसका प्रमुख कारण है। हालांकि, कांग्रेस के आरोपों और फारूक अब्दुल्ला पर हमले को लेकर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने सदन में जवाब दिया।
खरगे ने फारूक अब्दुल्ला पर हमले का मुद्दा उठाया
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा "फारूक अब्दुल्ला पर हमला हुआ है। उनकी सुरक्षा खतरे में है। जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा था। अब वहां की पुलिस और सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्री के पास होने से आज जम्मू-कश्मीर में ऐसी हालत है। जम्मू-कश्मीर से कानून व्यवस्था खत्म हो रही है और प्रमुख नेताओं को मारने का मंसूबा है। फारूक अब्दुल्ला को भी इस तरह मार दिया गया होता। उनके सुरक्षाकर्मियों ने उनकी जान बचाई।" कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा कि मैं जानना चाहता हूं कि क्या सरकार का फारूक अब्दुल्ला को मारने का इरादा है। अगर उनको सुरक्षित रखना चाहते थे, तो फुल सिक्योरिटी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने के बाद ही लोग सुरक्षित रह सकते हैं। केंद्र सरकार के हाथ में कश्मीर के लोग सुरक्षित नहीं है। क्योंकि सरकार का एक मंसूबा है कि जो लोग धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद और देश को एक करने की कोशिश कर रहे हैं, उनको खत्म करना है।
हमला चिंता का विषय, घटना की पूरी जांच की जाएगी- जेपी नड्डा
इस पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा "बुधवार रात फारूक अब्दुल्ला पर जानलेवा हमला हुआ। यह बहुत ही चिंता का विषय है और गंभीर मामला है। भारत सरकार इस घटना को लेकर बहुत गंभीर है। मैं सरकार की ओर से इस बात का विश्वास दिलाता हूं कि इस घटना की पूरी जांच की जाएगी। गिरफ्तार आरोपी के मंसूबों के बारे में गहराई से पता किया जाएगा। इस तरह की घटना दोबारा न हो और फारूक अब्दुल्ला के जीवन की रक्षा से जुड़ा हर कदम जरूर उठाया जाएगा।"
इसी बीच, जेपी नड्डा ने मल्लिकार्जुन खरगे के आरोपों को लेकर कांग्रेस की निंदा करते हुए कहा कि हर घटना को राजनीतिक चश्मे से देखना और उसे राजनीतिक रूप देना उचित नहीं है। पूर्व राज्य का दर्जा नहीं मिला, इस कारण यह घटना हुई, इस निष्कर्ष पर पहुंचना और सरकार पर गंभीर आरोप लगाना निंदनीय है। जेपी नड्डा ने अपने जवाब में आगे कहा कि विपक्ष के नेता की ओर से यह कहना कि सरकार का मंसूबा उनकी (फारूक) की जान लेना है। इस पर मेरा कहना है कि यह कांग्रेस की सोच का नतीजा है। हमेशा से कांग्रेस के मंसूबे इसी तरह के रहे हैं। विपक्ष ने सरकार के समय जम्मू-कश्मीर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की संदेहास्पद मौत पर कभी जवाब नहीं दिया।
राजीव शुक्ला ने भी हमले की निंदा की
वहीं कांग्रेस के राजीव शुक्ला ने भी हमले की निंदा की और कहा कि फारूक अब्दुल्ला पर हमला निंदनीय है। हमलावर, जो जम्मू का जाना-पहचाना व्यक्ति है, ने खुद स्वीकार किया कि वह पिछले 20 वर्षों से उन्हें मारने की कोशिश कर रहा था। इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। एक राष्ट्रीय नेता पर यह हमला खतरनाक संकेत है।
डॉ. फारूक पर फायरिंग कर जान लेने की कोशिश, बाल-बाल बचे
गौरतलब है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सीएम डॉ. फारूक अब्दुल्ला पर बुधवार रात करीब साढ़े दस बजे कनपटी से सटाकर पिस्टल से फायरिंग कर उनकी जान लेने की कोशिश की गई। डॉ. फारूक बाल-बाल बच गए। एनएसजी कमांडो से अगर चंद सेकंड की भी देरी होती तो कुछ भी हो सकता था। हमला उस वक्त हुआ जब वे जम्मू के ग्रेटर कैलाश स्थित रॉयल पार्क में एक शादी समारोह में शिरकत करने के बाद उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी के साथ वापस लौट रहे थे। जम्मू के पुरानी मंडी निवासी हमलावर कमल सिंह जम्वाल को मौके पर ही दबोच लिया गया।
