बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव: नीतीश कुमार ने विधान परिषद से दिया इस्तीफा, अब राज्यसभा का सफर शुरू

पटना/भीलवाड़ा। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार (30 मार्च) को आधिकारिक तौर पर बिहार विधान परिषद की अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद संवैधानिक बाध्यताओं का पालन करते हुए उन्होंने यह कदम उठाया है। इस इस्तीफे के साथ ही बिहार की सत्ता की धुरी और नीतीश कुमार की राजनीतिक भूमिका में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है।
सीएम हाउस में हुई इस्तीफे की पूरी प्रक्रिया
सोमवार सुबह से ही पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास (1, अणे मार्ग) पर राजनीतिक हलचल तेज रही। सुबह करीब 9 बजे जेडीयू के दिग्गज नेता ललन सिंह, संजय झा और विजय कुमार चौधरी सीएम हाउस पहुंचे। काफी देर तक चली गहन मंत्रणा के बाद नीतीश कुमार ने अपना इस्तीफा पत्र तैयार किया। पहले कयास लगाए जा रहे थे कि विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह खुद सीएम हाउस आएंगे, लेकिन अंत में प्रक्रिया में बदलाव किया गया।
भरोसेमंद मंत्रियों के जरिए भेजा त्यागपत्र
खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व्यक्तिगत रूप से विधान परिषद सचिवालय नहीं गए। उन्होंने अपना इस्तीफा पत्र अपने सबसे भरोसेमंद मंत्री विजय कुमार चौधरी और एमएलसी संजय गांधी को सौंपा। इन दोनों नेताओं ने सचिवालय जाकर सभापति को मुख्यमंत्री का त्यागपत्र विधिवत रूप से सौंपा।
संवैधानिक अनिवार्यता और आगे की राह
नियमों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति एक साथ दो सदनों का सदस्य नहीं रह सकता। चूंकि नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने जा चुके हैं, इसलिए उन्हें विधान परिषद की सदस्यता छोड़नी पड़ी। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी और राज्यसभा की सदस्यता के बीच आगामी राजनीतिक समीकरण किस तरह आकार लेते हैं।
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