महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी तेज, दो नए बिल ला सकती है सरकार

नई दिल्ली केंद्र सरकार महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू करने के लिए बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, सरकार संसद के मौजूदा बजट सत्र में दो अहम विधेयक लाने को तैयार है, ताकि परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही महिलाओं को आरक्षण का लाभ मिल सके। इस मुद्दे पर सहमति बनाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने एनडीए और गैर-कांग्रेस विपक्षी दलों के फ्लोर लीडर्स के साथ अलग-अलग बैठकें की हैं। यदि आम सहमति बनती है, तो ये विधेयक इसी सप्ताह संसद में पेश किए जा सकते हैं।
लोकसभा सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव, 33% महिलाओं के लिए आरक्षित
सरकार की योजना के मुताबिक, लोकसभा की सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती है। इनमें से लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह आरक्षण अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए पहले से मौजूद व्यवस्था की तरह वर्टिकल आधार पर लागू होगा। राज्य विधानसभाओं में भी इसी तर्ज पर सीटों का आरक्षण किया जाएगा, जो राज्यों की जनसंख्या के अनुपात में तय होगा।
दो बिलों से होगा रास्ता साफ
सूत्रों के अनुसार, सरकार एक संविधान संशोधन विधेयक के जरिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में बदलाव करेगी। वहीं, दूसरा सामान्य विधेयक परिसीमन अधिनियम में संशोधन के लिए लाया जाएगा। इन दोनों विधेयकों के पारित होने के बाद प्रस्तावित कानून 31 मार्च 2029 से लागू हो सकता है। इससे आगामी लोकसभा चुनावों और ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनावों में महिलाओं को आरक्षण मिल सकेगा।
परिसीमन आयोग की भूमिका अहम
परिसीमन आयोग एक स्वतंत्र और निष्पक्ष संस्था होती है, जिसका काम लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं तय करना है। इसके फैसलों को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहती है। हालांकि केंद्रीय चुनाव आयोग भी एक स्वतंत्र संस्था है, लेकिन उसे पूरे देश में परिसीमन कराने का अधिकार नहीं है।
आरक्षण तय करने के दो तरीके
महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों को तय करने के दो संभावित तरीके सामने आए हैं:-
जनसंख्या के आधार पर परिसीमन
या फिर सीटों का रोटेशन सिस्टम
2023 में मिली थी मंजूरी
सितंबर 2023 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महिला आरक्षण विधेयक को मंजूरी दी थी। यह कानून संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम के नाम से जाना जाता है। हालांकि, यह कानून अभी लागू नहीं हुआ है और इसके लिए जनगणना व परिसीमन प्रक्रिया पूरी होना जरूरी बताया गया था।
15 साल तक मिलेगा आरक्षण, OBC पर बहस जारी
इस कानून के तहत महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 15 वर्षों तक आरक्षण मिलेगा, जिसे संसद आगे बढ़ा भी सकती है। जहां SC और ST महिलाओं के लिए आरक्षण में उप-कोटा शामिल है, वहीं विपक्ष ने OBC महिलाओं के लिए भी आरक्षण की मांग उठाई है।
