रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव बोले- ट्रेन की बोगियों, डिब्बों और इंजनों का प्रमुख निर्यातक बन रहा भारत

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव बोले- ट्रेन की बोगियों, डिब्बों और इंजनों का प्रमुख निर्यातक बन रहा भारत
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वडोदरा रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार को कहा कि भारतीय रेलवे तेजी से बोगियों, डिब्बों, इंजन एवं संचालक प्रणालियों का प्रमुख निर्यातक बनकर उभर रहा है। यह सब 'मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड' दृष्टिकोण के तहत हो रहा है। मंत्री ने वडोदरा के सावली में अल्स्टॉम के संयंत्र का दौरा किया, जो भारत में रेलवे के संचालन के लिए एक महत्वपूर्ण उत्पादन केंद्र है।

उन्होंने बताया कि भारत में बने मेट्रो कोच ऑस्ट्रेलिया और कनाडा को निर्यात किए गए हैं, जबकि बोगी यूनाइटेड किंगडम, सऊदी अरब, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया भेजी गई हैं। भारत में निर्मित प्रोपल्शन सिस्टम फ्रांस, मैक्सिको, रोमानिया, स्पेन, जर्मनी और इटली को सप्लाई किए गए हैं।

इन देशों को निर्यात किए ट्रेन के डिब्बे और बोगियां

उन्होंने बताया कि भारत में बने मेट्रो डिब्बे ऑस्ट्रेलिया और कनाडा को निर्यात किए गए हैं, जबकि बोगियां ब्रिटेन, सऊदी अरब, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया को भेजी गई हैं। भारत में निर्मित प्रेरक प्रणाली (प्रोपल्शन सिस्टम) की फ्रांस, मैक्सिको, रोमानिया, स्पेन, जर्मनी और इटली को आपूर्ति की गई है। इसी तरह भारत में बने यात्री डिब्बे और स्वचलित इंजन (लोकोमोटिव) मोजाम्बिक, बांग्लादेश और श्रीलंका को निर्यात किए गए हैं।

रोजगार के अवसर पैदा कर रहा रेल घटकों का निर्यात: वैष्णव

वैष्णव ने कहा कि रेल घटकों का कई देशों को निर्यात भारत में रोजगार के अवसर पैदा कर रहा है। मंत्री ने यह भी कहा कि भारतीय इंजीनियर और कर्मचारी अब अंतरराष्ट्रीय मानकों में दक्षता हासिल कर रहे हैं, जिसे उन्होंने 'मेक इन इंडिया' मिशन की बड़ी कामयाबी बताया। उन्होंने अल्स्टॉम की सराहना करते हुए कहा कि वह हर ऑर्डर का खास तरीके से समाधान करता है, जिसे भारतीय रेलवे भी अपना सकता है। साथ ही, उन्होंने गति शक्ति विश्वविद्यालय के साथ मिलकर एक संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव रखा।

'सावली इकाई में प्रशिक्षण लें भी उत्पादन इकाइयों के प्रबंधक'

मंत्री ने सुझाव दिया कि सभी उत्पादन इकाइयों के महाप्रबंधक अल्स्टॉम की सावली इकाई में जाकर प्रशिक्षण लें और वहां का कामकाजी अनुभव हासिल करें। चर्चा के दौरान यह विचार भी आया कि सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से रखरखाव का ऐसा तरीका अपनाया जाए, जिससे किसी खराबी का पहले ही पता चल सके।

सावली इकाई में अत्याधुनिक अत्याधुनिक दैनिक यात्री ट्रेन (कम्यूटर) और शहरी परिवहन ट्रेन (ट्रांजिट) डिब्बों का उत्पादन किया जा रहा है, जो 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' की पहलों के लिए पूरी तरह समर्पित है। यहां भारत के 3,400 से ज्याादा इंजीनियर दुनियाभर की 21 अल्सटॉम इकाइयों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

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