वेनेजुएला पर अमेरिका के हवाई हमलों से दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा

वाशिंगटन/काराकस
अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव मामूली विवाद से बढ़कर एक गंभीर सैन्य टकराव का रूप ले चुका है। बुधवार को संयुक्त राज्य अमेरिका ने वेनेज़ुएला की राजधानी **काराकस** और देश के अन्य शहरों पर हवाई हमले किए हैं। कई इलाकों में तेज धमाकों की आवाजें रिपोर्ट हुई हैं और वेनेज़ुएला सरकार ने पूरे देश में **आपातकाल की घोषणा** कर दी है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार अमेरिकी सैन्य विमानों ने राजधानी काराकस के साथ कम से कम चार अन्य स्थानों को निशाना बनाया। स्थानीय लोगों ने रात में आसमान में रॉकेटों की चमक और धमाकों की आवाजें सुनीं, जिससे राजधानी में अफरातफरी का माहौल रहा। वेनेज़ुएला की आधिकारिक एजेंसियों ने कहा है कि हमलों से कुछ सैन्य प्रतिष्ठानों को लक्ष्य बनाया गया, लेकिन नागरिक इलाकों में भी प्रभाव पड़ा है।
वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति कार्यालय ने हमलों को “अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन” बताया है और अमेरिका पर **आक्रामकता फैलाने का आरोप** लगाया है। सरकार ने सीमा सुरक्षा पूरी तरह तैनात कर दी है और जनता से शांति बनाए रखने का आग्रह किया है। अमेरिकी प्रशासन की तरफ से अभी तक विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है, लेकिन सुरक्षा सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि यह कार्रवाई क्षेत्र में “आतंकवादी संचालन रुकवाने” के बहाने की गई है।
आर्थिक और बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर दिख सकता है। खासकर कच्चे तेल, सोना और चांदी जैसी कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव अधिक होता है। विशेषज्ञों के अनुसार जब भी दुनिया में बड़ी सैन्य या राजनीतिक अस्थिरता आती है, तो निवेश सुरक्षित साधनों की तरफ रुख बढ़ता है, जिससे सोना और चांदी की मांग व कीमतों में तेजी आ सकती है। कुछ अनुमान में सोने की कीमत 1,40,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, जबकि चांदी के भाव भी बढ़ सकते हैं।
भारतीय शेयर बाजारों पर फिलहाल इसका सीधा प्रभाव सीमित रहने का अनुमान है क्योंकि वेनेज़ुएला की अर्थव्यवस्था वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में तुलनात्मक रूप से छोटी है। हालांकि जोखिम भाव और निवेशकों की आशंका का असर बाजार की लिवाली तथा ट्रेडिंग सेंटिमेंट पर कुछ हद तक दिखाई दे सकता है।
अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषक इस घटना को अमेरिका और लैटिन अमेरिकी देशों के बीच बिगड़ते रिश्तों का एक गंभीर संकेत मान रहे हैं। भविष्य में स्थिति किस ओर जाती है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि दोनों देश किस स्तर पर बातचीत या तनाव कम करने के उपाय अपनाते हैं।
• वेनेज़ुएला सरकार ने अमेरिका की कार्रवाई को “सैन्य आक्रमण” और *अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन* बताया है और विरोध जताया है।
• यह घटना 2025 के दौरान भ्रष्टाचार और ड्रग तस्करी के आरोपों के चलते अमेरिका की पहले की सैन्य गतिविधियों और नौसैनिक ऑपरेशनों के बाद एक बड़ा उभार माना जा रहा है।
**स्थिति अभी भी विकसित हो रही है**
• अमेरिकी प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है कि किन लक्ष्यों पर हमला किया गया या इसके पूरे परिणाम क्या हैं। ([Wikipedia][1])
• वेनेज़ुएला और कुछ देशों ने संयुक्त राष्ट्र में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी की है।
यह कठिन अंतरराष्ट्रीय संकट का पहला बड़ा सैन्य मोड़ है और स्थिति के भविष्य में और बदलाव की आशंका बनी हुई है।
