सुरक्षा की होगी पूरी गांरटी: रेलवे में महिलाओं को मिलने जा रही बड़ी सुविधा

रेलवे में  महिलाओं को मिलने जा रही  बड़ी सुविधा
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नई दिल्ली। रेलवे ने सफर के दौरान महिला सुरक्षा पर ध्यान बढ़ाया है। यात्रा के दौरान महिलाओं की सुरक्षा के लिए सभी मेल एवं एक्सप्रेस ट्रेनों के कोचों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। चालू वित्त वर्ष में 11 हजार से अधिक कोच में कैमरे लगाए जा रहे हैं।

साथ ही अब जो भी कोच का निर्माण होगा, उन सबमें एसओएस (पैनिक) बटन लगाने की तैयारी है, जो आपात स्थिति में चालक एवं सुरक्षा दल को तुरंत अलर्ट कर सकेगा। रेलवे ने महिला यात्रियों की सुरक्षा को तरजीह देते हुए कई स्तरों पर कदम उठाए हैं। एआई आधारित निगरानी प्रणाली के माध्यम से संदिग्ध गतिविधियों की पहचान पर काम किया जा रहा है।

ट्रेन कोच में लगेंगे एचडी क्वालिटी के कैमरे

कोचों में लगने वाले सभी सीसीटीवी कैमरे एचडी क्वालिटी के होते हैं, जिनमें कम से कम एक महीने तक की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखा जा सकता है। सबसे ज्यादा प्राथमिकता महिला डिब्बों, स्लीपर और जनरल कोचों में सीसीटीवी लगाने को दी जा रही है। व्यवस्था की जा रही है कि सारे कैमरे आरपीएफ कंट्रोल रूम से सीधे कनेक्ट रहेंगे, जिससे निगरानी और एक्शन में तेजी लाई जा सकेगी।

नए कोचों में लगेंगी पैनिक बटन

रेलवे की तैयारी अगले दो वर्षों के दौरान सभी एक्सप्रेस ट्रेनों के कोचों में सीसीटीवी कैमरे लगा देने की है। सफर में महिला सुरक्षा की चुनौतियों को देखते हुए अब जितने कोच बनाए जा रहे हैं, उनमें पैनिक बटन लगाना अनिवार्य कर दिया गया है, जो मोबाइल ऐप से भी जुड़ा रहेगा, ताकि आपात स्थिति में यात्री मोबाइल से भी अलर्ट भेज सकता है। देश में बनाए जा रहे सभी स्मार्ट स्टेशनों पर फेस रिकग्निशन तकनीक, सीसीटीवी निगरानी और भीड़ नियंत्रण दल की व्यवस्था की जा रही है।

प्रतीक्षालयों में महिला स्टाफ की तैनाती अनिवार्य की जा रही है। संवेदनशील स्टेशनों फोकस बढ़ाया जा रहा है। रेलवे की सूची में सात सौ से अधिक स्टेशन 'संवेदनशील या अति-संवेदनशील' हैं, जहां अधिक संख्या में महिला आरपीएफ की तैनाती की जा रही है।

सफर में अपराध पर नियंत्रण के लिए लिया गया फैसला

रेलवे के कार्यकारी निदेशक (सूचना) दिलीप कुमार ने बताया कि ट्रेन सफर के दौरान अपराध नियंत्रण के लिए एकीकृत रणनीति बनाई गई है। हाल की समीक्षा में पाया गया कि 'रेल मदद' के माध्यम से खुफिया सूचनाओं में तेजी आई है। साथ ही 'मेरी सहेली' जैसी पहल ने सफर में महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ाया है।

इसे अत्यधिक व्यापक किया जा रहा है। प्रत्येक टीम में कम से कम दो सदस्य होती हैं। इनका काम रेल यात्रा के प्रारंभ से अंत तक निगरानी करना है। प्रत्येक लंबी दूरी की ट्रेनों में एक टीम की तैनाती की जाती है। जरूरत पड़ने पर संख्या बढ़ाई भी जाती है। अभी तक दो सौ स्टेशनों पर यह सक्रिय है।

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