चैत्र नवरात्र: मां ब्रह्मचारिणी की कठिन तपस्या से मिलता है विजय का आशीर्वाद

भीलवाड़ा | चैत्र नवरात्र के पावन पर्व पर आज उत्सव का दूसरा दिन है, जो पूरी तरह मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप, मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। मान्यता है कि आज के दिन सच्ची श्रद्धा से मां की पूजा और कथा श्रवण करने वाले भक्त के जीवन में संयम, तप और विजय की प्राप्ति होती है।
तप और सदाचार का प्रतीक है आज का दिन
आज के दिन मां की आराधना करने से भक्तों में त्याग, वैराग्य और सदाचार जैसे गुणों की वृद्धि होती है। मानसिक शक्ति की चाह रखने वाले साधकों के लिए मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान विशेष फलदायी माना गया है। 'मार्कंडेय पुराण' के अनुसार, मां ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हजारों वर्षों तक कठिन तप किया था।
हजारों वर्षों का कठिन संघर्ष और 'अपर्णा' नाम की महिमा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, हिमालय राज की पुत्री के रूप में जन्मी मां ने नारद जी के उपदेश पर घोर तपस्या शुरू की। उन्होंने एक हजार साल तक केवल फल-फूल खाए और सौ वर्षों तक जमीन पर रहकर शाक का सेवन किया। तपस्या इतनी कठिन थी कि उन्होंने अंत में जल और अन्न के साथ सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिया, जिसके कारण उनका नाम 'अपर्णा' पड़ा। उनकी इसी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उन्हें शिवजी को पति रूप में प्राप्त करने का वरदान दिया।
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