चैत्र नवरात्रि: शक्तिपीठों पर उमड़ा आस्था का सैलाब,: आज हो रही मां चंद्रघंटा की विशेष आराधना

भीलवाड़ा | जिले के शक्तिपीठों पर चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व की धूम मची हुई है और मंदिरों में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा के क्रम में आज तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की विधि-विधान से उपासना की जा रही है। धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान मां धरती पर पधारकर अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।
साहस और आत्मविश्वास की देवी हैं मां चंद्रघंटा
शास्त्रों के अनुसार, मां चंद्रघंटा की आराधना से भक्तों में साहस और आत्मविश्वास का संचार होता है। ज्योतिषीय दृष्टि से देवी का संबंध शुक्र ग्रह से है, जिससे उनकी पूजा से शुक्र दोषों का निवारण होता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। विशेष रूप से विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए मां चंद्रघंटा की पूजा अत्यंत लाभकारी मानी गई है।
दिव्य स्वरूप: सिंह पर सवार, मस्तक पर अर्धचंद्र
मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत भव्य और शांतिदायक है। स्वर्ण के समान चमकीले रंग वाली देवी सिंह पर सवार हैं। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है, जिसके कारण उन्हें 'चंद्रघंटा' कहा जाता है। उनकी दस भुजाएं गदा, त्रिशूल, तलवार और धनुष जैसे शस्त्रों से विभूषित हैं, जो दुष्टों के दमन और भक्तों के कष्ट निवारण के लिए सदैव तत्पर रहती हैं।
दूध से बनी मिठाइयों का भोग और मंत्र जाप
मां चंद्रघंटा को प्रसन्न करने के लिए आज के दिन दूध से बनी मिठाइयां और खीर का भोग लगाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे मानसिक और आर्थिक परेशानियों से मुक्ति मिलती है। पूजा के दौरान भक्त इस विशेष मंत्र का जाप कर रहे हैं:
> "या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नमः।।"
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