चैत्र नवरात्रि अष्टमी: मां महागौरी की भक्ति से महके आंगन, जानें व्रत कथा और महिमा

चैत्र नवरात्रि अष्टमी: मां महागौरी की भक्ति से महके आंगन, जानें व्रत कथा और महिमा
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भीलवाड़ा | शक्ति की उपासना के महापर्व चैत्र नवरात्र के आठवें दिन आज श्रद्धा और उल्लास के साथ मां महागौरी के स्वरूप का पूजन किया जा रहा है। मान्यता है कि अष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा करने से भक्तों के सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। आज के दिन श्रद्धालु व्रत रखकर कन्या पूजन (कंचक) करते हैं, जिससे मां अत्यंत प्रसन्न होती हैं।

कठोर तप से मिला 'गौर' वर्ण

पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हजारों वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। तपस्या के प्रभाव से उनका शरीर काला पड़ गया था। जब भगवान शिव उनकी भक्ति से प्रसन्न हुए, तब उन्होंने मां पार्वती के शरीर को गंगाजल से धोया, जिससे वे चांदनी के समान श्वेत और कांतिमय हो गईं। तभी से उनका नाम 'महागौरी' पड़ा।

करुणा की प्रतिमूर्ति और सिंह की भक्ति

एक अन्य रोचक कथा के अनुसार, जब मां तपस्या में लीन थीं, तब एक भूखा सिंह उन्हें अपना आहार बनाने की प्रतीक्षा में वहीं बैठ गया। वर्षों तक मां के साथ बैठे रहने के कारण वह सिंह भी दुबला हो गया। जब देवी तपस्या से उठीं, तो उन्होंने सिंह के इस 'धैर्यपूर्ण तप' को देखा और करुणावश उसे अपना वाहन बना लिया। यही कारण है कि मां महागौरी वृषभ (बैल) और सिंह, दोनों की सवारी करती हैं।

महागौरी की आरती: संकटों का होता है नाश

अष्टमी के दिन मां की आरती का विशेष महत्व है। भक्त "जय महागौरी जगत की माया..." के जयकारों के साथ मां की स्तुति कर रहे हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जो जातक शनिवार के दिन मां की विशेष पूजा करते हैं, उनके बिगड़े हुए काम बन जाते हैं और शनि दोषों से भी मुक्ति मिलती है।

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