खरमास शुरू:: आज से 14 अप्रैल तक मांगलिक कार्यों पर विराम, सूर्य उपासना का विशेष महत्व

आज से 14 अप्रैल तक मांगलिक कार्यों पर विराम, सूर्य उपासना का विशेष महत्व
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भीलवाड़ा। हिंदू पंचांग के अनुसार, आज से खरमास का प्रारंभ हो गया है, जो आगामी 14 अप्रैल तक जारी रहेगा। इस एक माह की अवधि में हिंदू धर्म में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और जनेऊ संस्कार जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर पूरी तरह से विराम लग गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब सूर्य देव बृहस्पति की राशि (धनु या मीन) में प्रवेश करते हैं, तो उनकी गति धीमी हो जाती है, जिसे 'खरमास' कहा जाता है।

क्यों वर्जित हैं मांगलिक कार्य?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, खरमास के दौरान सूर्य का प्रभाव कम हो जाता है और गुरु (बृहस्पति) भी निस्तेज हो जाते हैं। चूंकि किसी भी शुभ कार्य के लिए सूर्य और गुरु की स्थिति का प्रबल होना आवश्यक है, इसलिए इस समय में किए गए कार्यों का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। 14 अप्रैल को जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे (मेष संक्रांति), तब खरमास समाप्त होगा और पुनः शहनाइयां गूंजनी शुरू होंगी।

सूर्य देव को जल अर्पित करने का फल


खरमास का समय आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान दान-पुण्य और उपासना का विशेष फल मिलता है:

* अर्घ्य दान: प्रतिदिन प्रातःकाल सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन और फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है।

* मंत्र जाप: 'ॐ सूर्याय नमः' या 'आदित्य हृदय स्तोत्र' का पाठ करने से शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।

* दान का महत्व: इस महीने में जरूरतमंदों को गुड़, तिल, वस्त्र और अनाज का दान करना उत्तम माना गया है।

धार्मिक विशेषज्ञों का कहना है कि खरमास केवल शुभ कार्यों को रोकने का समय नहीं है, बल्कि यह आत्म-चिंतन और ईश्वर भक्ति में लीन होने का पवित्र अवसर है।

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