महाशिवरात्रि 2026: 25 वर्षों बाद बन रहा शुभ संयोग, चतुर्ग्रही योग में बरसेगी शिव कृपा

ज्योतिष डेस्क: इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत दुर्लभ होने जा रहा है। करीब 25 वर्षों बाद कई शुभ योगों का एक साथ मिलन हो रहा है। ज्योतिषविदों के अनुसार, इस दिन कुंभ राशि में बुधादित्य, शुक्रादित्य, लक्ष्मी नारायण और चतुर्ग्रही योग का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि, प्रीति, ध्रुव और व्यतिपात योग इस दिन की महत्ता को और बढ़ा रहे हैं।
माना जा रहा है कि ग्रह-नक्षत्रों की इस विशेष चाल में भोलेनाथ अपने भक्तों को लक्ष्मी का वरदान प्रदान करेंगे।
त्रिगुणी सृष्टि और पूजन के तीन भाव:
शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव की आराधना तीन भावों से की जाती है:
सात्विक पूजन: दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र और फलों से किया जाने वाला पूजन (गृहस्थों के लिए उत्तम)।
राजसिक पूजन: भांग, धतूरा, रुद्राक्ष और कमल पुष्पों से किया जाने वाला अर्चन।
तामसिक पूजन: अघोर साधना, भस्म आरती और भस्म श्रृंगार के माध्यम से शिव को प्रसन्न करना।
तिथियाँ और शुभ मुहूर्त:
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी, रविवार को शाम 5:04 बजे से शुरू होगी और 16 फरवरी को शाम 5:34 बजे समाप्त होगी। निशीथ काल पूजा का समय 16 फरवरी की रात 12:09 बजे से 1:01 बजे तक रहेगा।
चार प्रहर की पूजा का समय:
प्रथम प्रहर: शाम 6:11 बजे से रात 9:22 बजे तक।
द्वितीय प्रहर: रात 9:23 बजे से रात 12:34 बजे तक।
तृतीय प्रहर: रात 12:35 बजे से सुबह 3:46 बजे तक।
चतुर्थ प्रहर: 16 फरवरी सुबह 3:46 बजे से सुबह 6:59 बजे तक।
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