कर संक्रांति 2026:: सूर्य का उत्तरायण और शुभ संयोगों की त्रिवेणी, जानें क्यों है यह वर्ष खास

सूर्य का उत्तरायण और शुभ संयोगों की त्रिवेणी, जानें क्यों है यह वर्ष खास
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भारतीय सनातन परंपरा में मकर संक्रांति का पर्व केवल ऋतु परिवर्तन का सूचक नहीं, बल्कि नई ऊर्जा और चेतना के संचार का प्रतीक है। वर्ष 2026 में मकर संक्रांति का उत्सव विशेष होने जा रहा है, क्योंकि इस बार सूर्यदेव के उत्तरायण होने के साथ-साथ दुर्लभ ज्योतिषीय योगों का निर्माण हो रहा है, जो सुख-समृद्धि और सफलता के द्वार खोलेंगे।

​खगोलीय घटना और आध्यात्मिक महत्व

​मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हैं। ज्योतिष शास्त्र में मकर राशि को कर्म, अनुशासन और स्थिरता की राशि माना गया है। सूर्य का इसमें प्रवेश व्यक्ति के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि करता है। उत्तरायण काल को 'देवताओं का दिन' कहा जाता है, जो अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संदेश देता है।

​वर्ष 2026 के विशेष शुभ संयोग

​इस वर्ष की संक्रांति पर ग्रहों की स्थिति अत्यंत फलदायी रहने वाली है:

​रवि योग का निर्माण: वर्ष 2026 में संक्रांति के अवसर पर 'रवि योग' का संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस योग में किए गए कार्यों से सभी बाधाएं दूर होती हैं और 'कार्य सिद्धि' प्राप्त होती है।

​सूर्य का पूर्ण तेज: मकर राशि में सूर्य की मजबूत स्थिति प्रशासन, पद-प्रतिष्ठा और करियर में उन्नति के नए अवसर प्रदान करेगी।

​धन-धान्य के योग: ग्रहों की विशेष स्थिति इस वर्ष आर्थिक विकास और नई योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए बेहद अनुकूल संकेत दे रही है।

​दान और संकल्प का महापर्व

​मकर संक्रांति को आत्मशुद्धि का पर्व माना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और तिल-गुड़ के दान का विधान है। विद्वानों के अनुसार, रवि योग के प्रभाव के कारण इस वर्ष मकर संक्रांति पर किए गए संकल्पों का प्रभाव दीर्घकालिक होगा। यह समय नई योजनाओं की नींव रखने और पुरानी नकारात्मकता को त्यागने के लिए सर्वश्रेष्ठ है।

​"मकर संक्रांति कर्म और प्रकाश का संतुलन है। रवि योग का साथ मिलना इस वर्ष के पर्व को और भी अधिक प्रभावशाली बनाता है।"

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