नवरात्रि सप्तमी: मां कालरात्रि की उपासना से दूर होंगे भय और संकट, जानें पूजा विधि और मंत्र

नवरात्रि सप्तमी: मां कालरात्रि की उपासना से दूर होंगे भय और संकट, जानें पूजा विधि और मंत्र
X


भीलवाड़ा। चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन आज आदिाशक्ति के अत्यंत पराक्रमी और भयंकर स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जा रही है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब माता पार्वती ने शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज जैसे महादानवों का वध करने के लिए अपने स्वर्णिम वर्ण को त्याग दिया था, तब वे कालरात्रि के रूप में प्रकट हुईं।

स्वरूप और महिमा




मां कालरात्रि का वाहन गधा है और उनकी चार भुजाएं हैं। दाहिनी ओर का ऊपर वाला हाथ वरद मुद्रा में और नीचे वाला हाथ अभयमुद्रा में रहता है, जो भक्तों को सुरक्षा का आशीष देता है। वहीं, बायीं ओर के हाथों में लोहे का कांटा और खड़ग सुशोभित है। देवी का एक नाम 'शुभंकारी' भी है, क्योंकि वे सदैव शुभ फल प्रदान करती हैं। उनके स्मरण मात्र से ही भूत-पिशाच, भय और हर प्रकार की बाधा तुरंत दूर हो जाती है।

सिद्ध मंत्र और स्त्रोत

आज के दिन भक्त विशेष फल प्राप्ति के लिए इन मंत्रों का जाप कर रहे हैं:

बीज मंत्र: ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥

प्रार्थना: या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

स्त्रोत और कवच का महत्व

शास्त्रों के अनुसार, सप्तमी के दिन मां कालरात्रि के स्त्रोत और कवच का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

कवच अंश:

ॐ क्लीं मे हृदयम् पातु पादौ श्रीकालरात्रि।

ललाटे सततम् पातु तुष्टग्रह निवारिणी॥

आरती की गूंज

नगर के मंदिरों में "कालरात्रि जय जय महाकाली, काल के मुँह से बचाने वाली" की आरती के साथ विशेष अनुष्ठान किए जा रहे हैं। भक्तों का विश्वास है कि जो मां की शरण में आता है, उस पर कोई कष्ट या बीमारी भारी नहीं पड़ती।

भीलवाड़ा हलचल न्यूज पोर्टल पर अपनी खबर देने के लिए संपर्क करें:

समाचार: प्रेम कुमार गढवाल 9413376078 (Email: [email protected], व्हाट्सएप: 9829041455)

विज्ञापन: विजय गढवाल 6377364129

संपर्क कार्यालय: भीलवाड़ा हलचल, कलेक्ट्री रोड, नई शाम की सब्जी मंडी, भीलवाड़ा

फोन: 7737741455

Next Story