बसंत पंचमी आज: गजकेसरी और शिव योग के दुर्लभ संयोग में मनेगा विद्या का पर्व, अबूझ मुहूर्त में गूंजेगी शहनाइयां

बसंत पंचमी आज: गजकेसरी और शिव योग के दुर्लभ संयोग में मनेगा विद्या का पर्व, अबूझ मुहूर्त में गूंजेगी शहनाइयां
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​भीलवाड़ा। विद्या, बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती की आराधना का पावन पर्व बसंत पंचमी शुक्रवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष यह पर्व कई दुर्लभ और शुभ संयोगों के साथ आया है, जिससे इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है। माघ शुक्ल पंचमी के दिन उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के साथ गजकेसरी और शिव योग का विशेष संगम हो रहा है।

​अबूझ मुहूर्त: खरीदारी और मांगलिक कार्यों की धूम

नगर व्यास राजेंद्रकुमार के अनुसार, पंचमी तिथि गुरुवार देर रात 2:30 बजे से शुरू होकर शुक्रवार देर रात 1:47 बजे तक रहेगी। बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त माना जाता है, इसलिए आज के दिन बिना पंचांग देखे गृह प्रवेश, भूमि पूजन, नया व्यापार शुरू करना या वाहन खरीदना अत्यंत शुभ फलदायी होगा। हालांकि नियमित विवाह मुहूर्त 4 फरवरी से शुरू होंगे, लेकिन अबूझ मुहूर्त होने के कारण आज कई एकल और सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित हो रहे हैं।

​सरस्वती पूजन और बच्चों के लिए विशेष उपाय:

शिक्षण संस्थानों, मंदिरों और घरों में आज मां सरस्वती का विशेष पूजन किया जाएगा। ज्योतिषियों के अनुसार, बच्चों को विद्यावान बनाने के लिए आज विशेष उपाय किए जा सकते हैं:

​शुभ समय: सुबह 7:00 से 11:15 बजे तक और दोपहर में अभिजीत मुहूर्त 12:22 से 1:00 बजे तक।

​उपाय: बच्चों से 'ऐं नमः' मंत्र का 108 बार जाप कराएं। केसर के पानी से सरस्वती यंत्र पर तिलक लगाकर बच्चे की जिह्वा पर स्वर्ण/रजत सलाखा या अनार की कलम से 'ऐं' शब्द लिखना शुभ माना जाता है।

​दान का महत्व: पीले वस्त्र, पीले चावल, दाल और गुड़ का दान करने से मां सरस्वती प्रसन्न होती हैं और जीवन में समृद्धि आती है।

​बाजारों में रौनक, आगे भी रहेंगे शुभ योग:

बसंत पंचमी के साथ ही बाजारों में ज्वेलरी, कपड़े और पूजा सामग्री की खरीदारी के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है। आने वाले दिनों में भी शुभ कार्यों के लिए कई योग बन रहे हैं:

​25 जनवरी: रवि योग।

​27 व 28 जनवरी: सर्वार्थसिद्धि योग।

​1 फरवरी: रवि पुष्य योग और सर्वार्थसिद्धि योग का महासंयोग।

पूजा और उपाय:

सरस्वती पूजा: सुबह स्नान के बाद सरस्वती जी को पीले और सफेद फूल चढ़ाएं, कलम, किताब और कॉपी पर हल्दी लगाकर पूजन करें।

तिलक और भोग: माथे, कंठ और नाभि पर केसर का तिलक लगाएं; दूध और केसर से बना भोग भगवान विष्णु को अर्पित करें।

आशीर्वाद: गुरुजनों और माता-पिता के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेना चाहिए।

क्या करें:

विद्यार्थी इस दिन से अपनी पढ़ाई शुरू कर सकते हैं।

यह दिन रचनात्मकता और ज्ञान में वृद्धि के लिए नई शुरुआत का अवसर देता है।

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