भक्ति के सागर में डूबी वस्त्र नगरी: भीलवाड़ा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, भव्य कलश यात्रा के साथ शिव महापुराण कथा का श्रीगणेश कल
भीलवाड़ा हलचल । मेवाड़ की पावन धरा और वस्त्र नगरी के नाम से विख्यात भीलवाड़ा शहर आज एक नए आध्यात्मिक इतिहास का साक्षी बना। सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा (सीहोर वाले) के मुखारविंद से होने वाली 'शिव महापुराण कथा' की पूर्व संध्या पर शहर में जो नजारा दिखा, उसने देवलोक की स्मृति ताजा कर दी। राजेंद्र मार्ग स्कूल के विशाल मैदान से जब हजारों की संख्या में माताएं-बहनें सिर पर मंगल कलश धारण कर निकलीं, तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो साक्षात गंगा की धारा भीलवाड़ा की सड़कों पर उतर आई हो।
केसरिया हुआ शहर: भक्ति और उल्लास का अनूठा संगम
मंगलवार शाम 4 बजे जब संकटमोचन हनुमान मंदिर के महंत बाबूगिरी महाराज के पावन सानिध्य में शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ, तो समूचा वातावरण 'हर-हर महादेव' और 'श्री शिवाय नमस्तुभ्यं' के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। आयोजन समिति के अध्यक्ष और विधायक अशोक कोठारी, कार्यकारी अध्यक्ष राधेश्याम सोमानी व वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुनील जागेटिया के नेतृत्व में निकली इस भव्य शोभायात्रा ने शहर को पूरी तरह भगवा रंग में सराबोर कर दिया।
हजारों की संख्या में महिलाएं पारंपरिक चुनड़ी ओढ़कर, माथे पर तिलक लगाए और सिर पर पवित्र कलश लिए कदमताल कर रही थीं। वहीं, पुरुष श्वेत धवल कुर्ता-पायजामा और मस्तक पर साफा धारण कर शिवभक्ति के इस महाकुंभ की शोभा बढ़ा रहे थे। हाथी, घोड़े, सजी-धजी बग्गियां और ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरकती महिलाएं इस बात का प्रमाण थीं कि भीलवाड़ा की जनता इस आध्यात्मिक आयोजन के लिए कितनी आतुर थी।
अभूतपूर्व स्वागत और आस्था की अटूट डोर
शोभायात्रा जिन रास्तों से गुजरी, वहां पुष्पवर्षा कर भक्तों का स्वागत किया गया। शहर के चप्पे-चप्पे पर लगे पोस्टर-बैनर और स्वागत द्वारों ने उत्सव के माहौल को और भी जीवंत बना दिया। कथा को लेकर उत्साह का आलम यह है कि शहर की तमाम होटलें और धर्मशालाएं कई दिन पहले ही बुक हो चुकी हैं। बाहर से आने वाले श्रद्धालु अपने रिश्तेदारों और परिचितों के घरों में डेरा डाले हुए हैं। मेजबान भीलवाड़ा वासी भी अतिथि देवो भव: की परंपरा निभाते हुए शिव भक्तों की सेवा में जुटे हैं।
मेडिसिटी ग्राउंड बना 'शिवधाम', पंडाल में अभी से डेरा
कथा विधिवत रूप से 8 अप्रैल से मेडिसिटी ग्राउंड में शुरू होगी, लेकिन भक्तों की अटूट श्रद्धा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंगलवार दोपहर से ही मुख्य पंडाल में लोगों ने अपनी जगह सुरक्षित करनी शुरू कर दी। भीषण गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं का जोश कम नहीं पड़ रहा है।
श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए करीब साढ़े चार लाख वर्ग फीट क्षेत्र में तीन विशाल वाटरप्रूफ डोम और पाइप पांडाल तैयार किए गए हैं। कथा प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक होगी, जिसमें लाखों भक्तों के जुटने की संभावना है। कथा के पास (Pass) को लेकर भी श्रद्धालुओं में भारी होड़ मची हुई है, हर कोई इस अमृत वर्षा का भागीदार बनना चाहता है।
सुरक्षा और सेवा का पुख्ता प्रबंध
इतने विशाल जनसमूह को नियंत्रित करने के लिए आयोजन समिति के स्वयंसेवकों के साथ-साथ पुलिस प्रशासन भी मुस्तैद है। जगह-जगह पेयजल और चिकित्सा सहायता के इंतजाम किए गए हैं। पुलिस के आला अधिकारी खुद सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन की निगरानी कर रहे हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
कल बुधवार से जब पंडित प्रदीप मिश्रा अपनी सुमधुर वाणी से भगवान शिव की महिमा का बखान करेंगे, तब भीलवाड़ा केवल एक औद्योगिक शहर नहीं, बल्कि एक तपोभूमि के रूप में पहचाना जाएगा। आस्था के इस महाकुंभ ने सिद्ध कर दिया है कि आधुनिकता के दौर में भी सनातन संस्कृति और शिव भक्ति की जड़ें भीलवाड़ा की मिट्टी में कितनी गहरी हैं।
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