आज से बजेंगे बैंडबाजे, शुरू हो गई हैं शुभ तिथियां

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2026 का पहला विवाह मुहूर्त 5 फरवरी को रहेगा. साल का आखिरी मुहूर्त 6 दिसंबर को होगा. सालभर में कुल 59 विवाह मुहूर्त रहेंगे. फ़रवरी से मार्च तक विवाह संभव हैं, लेकिन खरमास के कारण 14 मार्च से 13 अप्रैल तक विवाह स्थगित रहेंगे. फरवरी में 12, मार्च में 8, अप्रैल में 8 और मई में भी 8 शुभ मुहूर्त रहेंगे. हालांकि बीच के कुछ महीने ऐसे भी हैं, जिनमें एक भी विवाह के मुहूर्त नहीं हैं. हिंदू धर्म में सभी 16 संस्कारों में विवाह को सबसे महत्वपूर्ण संस्कारों में से एक माना जाता है. हर साल 15 जनवरी को धनुर्मास खत्म होते ही शादियों के मुहूर्त शुरू हो जाते हैं. इस बार शुक्र ग्रह अस्त होने के कारण जनवरी में शादी के लिए एक भी मुहूर्त नहीं हैं.

वर्ष 2026 में शुक्र अस्त होने के कारण खरमास समाप्त होने के बाद भी विवाह वर्जित रहेंगे. 9 दिसंबर 2025 को अस्त होने वाला शुक्र 1 फरवरी 2026 तक अस्त रहेगा. इसके बाद 4 फरवरी 2026 से विवाह पुनः प्रारंभ होंगे. इसके बाद फरवरी के अंत से 4 मार्च तक होलाष्टक काल के कारण विवाहों पर फिर से रोक लग जाएगी.

वैदिक ज्योतिष में गुरु को शुभ फलदायी ग्रह माना गया है. जन्म कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति शुभ होने पर व्यक्ति को हर क्षेत्र में सफलता हासिल होती है. गुरु की कमजोर स्थिति से जातक को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. गुरु धनु व मीन राशि के स्वामी ग्रह हैं. यह कर्क राशि में उच्च व शनिदेव की राशि मकर में नीच के माने जाते हैं. प्रत्येक गुरुवार शिवजी को बेसन के लड्डू चढ़ाने चाहिए. गुरुवार को व्रत करें. इस दिन पीली वस्तुओं का दान अपने सार्म्थ्यनुसार करें. गुरुवार के दिन विष्णु भगवान को घी का दीपक लगाएं. शास्त्रों के मुताबिक विवाह में गुरु ग्रह को उदय होना आवश्यक माना जाता है. हमारे षोडश संस्कारों में विवाह का बहुत महत्त्व है. विवाह का दिन व लग्न निश्चित करते समय वर एवं वधु की जन्म पत्रिका अनुसार सूर्य, चंद्र व गुरु की गोचर स्थिति का ध्यान रखना अति आवश्यक होता है. जिसे त्रिबल शुद्धि कहा जाता है.

आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से भगवान विष्णु क्षीर सागर में विश्राम करने चले जाते हैं. वहीं, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर योगनिद्रा से जागृत होते हैं. इस दौरान विवाह समेत सभी प्रकार के मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं. वहीं, देवउठनी एकादशी से शुभ कार्य किए जाते हैं. चातुर्मास के दौरान विवाह संबंधित कार्य भी नहीं किए जाते हैं. इसके साथ ही सूर्य देव के धनु और मीन राशि में गोचर के दौरान भी शादी नहीं की जाती है. इस दौरान गुरु का प्रभाव क्षीण हो जाता है.

शुक्र - गुरु ग्रह के अस्त होने पर विवाह नहीं होते

विवाह मुहूर्त की गणना करते समय शुक्र तारा और गुरु तारा पर विचार किया जाता है. बृहस्पति और शुक्र के अस्त होने पर विवाह और अन्य मांगलिक कार्यक्रम नहीं किए जाते है. इसलिए, इस दौरान कोई विवाह समारोह नहीं किया जाना चाहिए.

खरमास और चातुर्मास 2026

14 मार्च 2026 को सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही खरमास पुनः प्रारंभ हो जाएगा. खरमास 13 अप्रैल 2026 तक रहेगा. इस दौरान विवाह नहीं हो सकेंगे. इसके बाद, विवाह का मौसम पुनः शुरू हो जाएगा, जो चातुर्मास के प्रारंभ तक जारी रहेगा. चातुर्मास देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होकर देवउठनी एकादशी पर समाप्त होता है. देवउठनी एकादशी के अगले दिन तुलसी विवाह किया जाता है और इसके साथ ही शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं. 2026 में, देवशयनी एकादशी 25 जुलाई 2026 को और देवउठनी एकादशी 20 नवंबर 2026 को पड़ेगी. इसलिए, 25 जुलाई से 20 नवंबर 2026 के बीच कोई भी शुभ कार्य नहीं होंगे.

विवाह का धार्मिक महत्व

सनातन धर्म दुनिया के सबसे पुराने धर्मों में से एक है, जो कई प्रकार की परंपराओं और मान्यताओं से समृद्ध है. इस परंपरा में से एक शुभ विवाह भी है, यह जीवन का सबसे खुशनुमा पल होता है. विवाह कई तरह से किए जाते हैं, प्रत्येक के अपने-अपने रीति-रिवाज और महत्व होते हैं. हिंदू धर्म में यह 16 संस्कारो मे से एक होता है और इसके बगैर कोई भी व्यक्ति ग्रहस्थाश्रम में प्रवेश नहीं कर सकता है. इसलिए हमारे शास्त्रों में विवाह को सबसे महत्वपूर्ण और कल्याणकारी माना जाता है.

वर्ष 2026 के शुभ मुहूर्त

फरवरी 2026 - 5, 6, 8, 10, 12, 14, 19, 20, 21, 24, 25 और 26 फरवरी

मार्च 2026 -1, 3, 4, 7, 8, 9, 11 और 12 मार्च

अप्रैल 2026 - 15, 20, 21, 25, 26, 27, 28 और 29 अप्रैल

मई 2026 - 1, 3, 5, 6, 7, 8, 13, 14 मई

जून 2026 - 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 29 जून

जुलाई 2026 - 1, 6, 7, 11 जुलाई

नवंबर 2026 - 21, 24, 25 और 26 नवंबर

दिसंबर 2026 -2, 3, 4, 5, 6, 11 और 12 दिसंबर

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