चाणक्य नीति: बिना आग के इंसान को भीतर तक जला देती हैं ये 6 स्थितियां

चाणक्य नीति: बिना आग के इंसान को भीतर तक जला देती हैं ये 6 स्थितियां
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आचार्य चाणक्य की नीतियों में जीवन की कुछ ऐसी स्थितियों का उल्लेख मिलता है जो बिना आग के ही इंसान को भीतर तक जला देती हैं। चाणक्य नीति के श्लोकों में केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक जीवन से जुड़े गहरे सत्य के बारे में बताया गया है। परिवार, समाज और व्यक्तिगत सम्मान से जुड़ी ये बातें आज के तनावपूर्ण जीवन में हर किसी को जाननी चाहिए।

चाणक्य नीति का वह महत्वपूर्ण श्लोक:

कान्तावियोगः स्वजनापमानो ऋणस्य शेषः कु-नृपस्य सेवा। दरिद्रभावो विषया सभा च विनाग्निमेते प्रदहन्ति कायम्॥

अर्थ: प्रिय जीवनसाथी से वियोग, अपनों के द्वारा किया गया अपमान, कर्ज का बोझ, दुष्ट राजा या गलत संस्थान (बॉस) की सेवा, गरीबी की स्थिति और मूर्ख लोगों की सभा—ये सभी परिस्थितियां बिना अग्नि के ही मनुष्य के शरीर और मन को जलाती रहती हैं।

मानसिक पीड़ा और तनाव से बचने के लिए खास टिप्स:

रिश्तों का सम्मान: करीबी संबंधों में संवाद (Communication) बनाए रखें। दूरी और गलतफहमी गहरे मानसिक कष्ट का कारण बनती है।

स्वाभिमान सर्वोपरि: अपने आत्मसम्मान की रक्षा करें। जहाँ बार-बार अपमान हो, वहाँ अपनी सीमाएं (Boundaries) तय करना सीखें।कर्ज से दूरी: ऋण हमेशा सोच-समझकर लें। अनावश्यक आर्थिक बोझ मानसिक तनाव का सबसे बड़ा कारण बनता है।गलत नेतृत्व से बचाव: अनैतिक या दुष्ट लोगों के अधीन काम करने से बचें, क्योंकि यह आपके चरित्र और शांति दोनों को नष्ट करता है।संगति का चुनाव: मूर्ख या नकारात्मक सोच वाले लोगों की सभा से दूर रहना ही बुद्धिमानी है।

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