सावधान: 'गूगल डॉक्टर' बन खुद दवा लेना पड़ सकता है महंगा, डॉ. खंडेलवाल और डॉ. शर्मा ने दी बड़ी चेतावनी

सावधान: गूगल डॉक्टर बन खुद दवा लेना पड़ सकता है महंगा, डॉ. खंडेलवाल और डॉ. शर्मा ने दी बड़ी चेतावनी
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भीलवाड़ा। कोरोना काल के बाद लोग सामान्य बीमारी होने पर अस्पताल जाने के बजाय गूगल और सोशल मीडिया पर अधूरी जानकारी लेकर खुद ही डॉक्टर बन रहे हैं। यह 'सेल्फ मेडिकेशन' की आदत अब भीलवाड़ा सहित आसपास के क्षेत्रों में लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। बिना डॉक्टर के परामर्श के एंटीबायोटिक दवाओं का अंधाधुंध सेवन शरीर को अंदर से खोखला कर गंभीर बीमारियों को बुलावा दे रहा है।

डॉ. नरेश खंडेलवाल: "अधूरा कोर्स है सबसे बड़ा खतरा"

वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नरेश खंडेलवाल ने एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए कहा कि, "एंटीबायोटिक दवाएं शरीर में मौजूद बैक्टीरिया को मारने का काम करती हैं। वर्तमान में अधिकांश मरीज दवाइयों का एक बार सेवन करने के बाद या थोड़ा ठीक महसूस होते ही कोर्स अधूरा छोड़ देते हैं। ऐसा करने से शरीर में 'ड्रग रेजिस्टेंस' बढ़ जाता है। यानी बैक्टीरिया और अधिक मजबूत होकर रेजिस्टेंस बना लेते हैं, जिसके बाद भविष्य में उस मरीज पर दवाइयां असर करना बंद कर देती हैं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर की सलाह पर ही ब्लड जांच करवाएं और फिर दवाओं का नियमित कोर्स पूरा करें।"

डॉ. दुष्यंत शर्मा: "केमिस्ट से सीधे दवा लेना भविष्य के लिए घातक"

वहीं, डॉ. दुष्यंत शर्मा ने लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि, "अक्सर देखने में आता है कि टायफाइड, बुखार या जुकाम होने पर लोग सीधे केमिस्ट की दुकान पर जाकर दवा ले लेते हैं। मरीज को यह पता नहीं होता कि कौन सी एंटीबायोटिक किस बैक्टीरिया पर काम करेगी। यह लापरवाही बैक्टीरिया को और शक्तिशाली बना देती है। बुजुर्गों और बच्चों के मामले में यह और भी खतरनाक है। किसी भी ऑनलाइन ऐप या इंटरनेट की जानकारी के आधार पर इलाज शुरू न करें। सबसे पहले विशेषज्ञ से परामर्श लें और रिपोर्ट के आधार पर ही सटीक इलाज करवाएं।"

विशेषज्ञों के स्वास्थ्य टिप्स: इनका रखें विशेष ध्यान

एक विशेष सत्र के दौरान दोनों चिकित्सकों ने आमजन को जागरूक करने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए:

* जांच अनिवार्य: बीमारी में सबसे पहले डॉक्टर से मिलें और आवश्यकतानुसार ब्लड टेस्ट करवाएं।

* कोर्स पूरा करें: ठीक महसूस होने पर भी एंटीबायोटिक दवा का कोर्स कभी बीच में न छोड़ें।

* हाइजीन और पानी: हमेशा आरओ का साफ पानी पिएं और संक्रमण से बचने के लिए हाथों को नियमित धोएं।

* टीकाकरण: संक्रमण की रोकथाम के लिए बच्चों के साथ-साथ वयस्कों का भी समय पर टीकाकरण जरूरी है।

* दवा की जानकारी: डॉक्टर से हमेशा पूछें कि एंटीबायोटिक लेना क्यों जरूरी है और इसके क्या प्रभाव हो सकते हैं।

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