थैलेसीमिया और हीमोफिलिया मरीजों के लिए नए नियम: आयुष्मान योजना का लाभ चाहिए, तो अस्पताल में रहना होगा 'इतने' घंटे भर्ती

थैलेसीमिया और हीमोफिलिया मरीजों के लिए नए नियम: आयुष्मान योजना का लाभ चाहिए, तो अस्पताल में रहना होगा इतने घंटे भर्ती
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​भीलवाड़ा हलचल। मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (MAAY) के तहत इलाज कराने वाले थैलेसीमिया और हीमोफिलिया के मरीजों के लिए राज्य सरकार ने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब इन बीमारियों से ग्रसित मरीजों को इलाज और योजना का लाभ लेने के लिए अस्पताल में एक निर्धारित समय तक एडमिट रहना अनिवार्य होगा। बिना तय समय पूरा किए अब योजना के तहत क्लेम नहीं मिल सकेगा।

​क्या हैं नए नियम?

​योजना के तहत लाभ लेने के लिए मरीजों को अब वार्ड में भर्ती रहकर उपचार कराना होगा। समय की सीमा इस प्रकार तय की गई है:

​थैलेसीमिया मरीज: इन मरीजों के लिए अस्पताल में 4 से 12 घंटे तक रुकना अनिवार्य कर दिया गया है।

​हीमोफिलिया मरीज: हीमोफिलिया के मरीजों के लिए नियम और सख्त हैं, उन्हें अब कम से कम 24 घंटे तक अस्पताल में एडमिट रहना होगा।

​क्यों लिया गया यह फैसला?

​अक्सर देखा गया है कि इन बीमारियों के मरीज इंजेक्शन या ब्लड ट्रांसफ्यूजन के तुरंत बाद घर चले जाते थे, जिससे रिकॉर्ड रखने और योजना के क्लेम प्रोसेस में तकनीकी दिक्कतें आती थीं। सरकार का मानना है कि अस्पताल में रुकने से न केवल मरीज की निगरानी बेहतर होगी, बल्कि योजना में पारदर्शिता भी बनी रहेगी।

​मरीजों पर असर

​भीलवाड़ा जिले के सैकड़ों मरीज जो नियमित रूप से जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में अपना इलाज कराते हैं, उन्हें अब इन नए समय नियमों का पालन करना होगा। अस्पताल प्रशासन को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे इन मरीजों के लिए बेड की उपलब्धता और निर्धारित समय की निगरानी सुनिश्चित करें।

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