युद्ध की तपिश: स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी मार, दवाओं और सर्जिकल आइटम्स के दाम 30% तक उछले

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध के हालातों ने अब आम आदमी की सेहत और जेब पर सीधा हमला बोल दिया है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिसका असर स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर साफ देखा जा रहा है। दवाओं के कच्चे माल (एपीआई) और सर्जिकल सामानों की कीमतों में भारी उछाल आने से इलाज का कुल खर्च औसतन 30 प्रतिशत तक बढ़ गया है।
एपीआई की कीमतों में भारी वृद्धि
दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले 'एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स' (API) की लागत में 25 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। कुछ विशेष जीवन रक्षक दवाओं के कच्चे माल की कीमत में तो 166 प्रतिशत तक का रिकॉर्ड उछाल आया है। इसके चलते पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स और विटामिन सप्लीमेंट्स जैसी रोजमर्रा की दवाएं भी 10 से 15 प्रतिशत महंगी हो गई हैं।
अस्पतालों में गहराया सर्जिकल संकट
युद्ध के चलते केवल दवाएं ही नहीं, बल्कि सर्जिकल आइटम्स की सप्लाई भी बाधित हो गई है। स्थानीय अस्पतालों में सर्जिकल टेंडर प्रक्रिया प्रभावित होने से मरीजों को सूचर्स (टांके का धागा) जैसी बुनियादी चीजें भी बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। हालांकि राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर मामूली वृद्धि की थी, लेकिन बाजार से डिस्काउंट खत्म होने और कच्चा माल महंगा होने से उपभोक्ताओं पर 10 से 12 फीसदी का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।
विशेषज्ञों की राय
दवा विक्रेता संघ के विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यदि संघर्ष विराम भी हो जाता है, तो भी सप्लाई चेन को पटरी पर आने में लंबा समय लगेगा। वर्तमान में दवा बाजार में स्टॉक की कमी होने लगी है, जिससे आने वाले दिनों में संकट और गहरा सकता है।
