भीलवाड़ा MG अस्पताल के डॉक्टरों का कमाल:: 2 वर्षीय मासूम की बचाई जान, भोजन नली में फंसी 'बटन बैटरी' को सफलतापूर्वक निकाला


भीलवाड़ा : शहर के महात्मा गांधी अस्पताल के डॉक्टरों ने एक बार फिर अपनी कार्यकुशलता और तत्परता का परिचय देते हुए एक दो साल की मासूम बच्ची को नई जिंदगी दी है। कोटड़ी क्षेत्र के रेडवास गांव की रहने वाली देवांशी ने खेलते समय गलती से रिमोट या खिलौने की 'बटन बैटरी' निगल ली थी, जो उसकी भोजन नली (इसोफेगस) में जाकर फंस गई थी।

एक्स-रे में हुई पुष्टि, तुरंत शुरू हुआ ऑपरेशन

परिजनों के अनुसार, बच्ची ने मंगलवार सुबह बैटरी निगली थी, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी। उसे तुरंत एमजी अस्पताल लाया गया, जहां ईएनटी विभाग के डॉक्टरों ने एक्स-रे करवाया। रिपोर्ट में बैटरी के गले के नीचे भोजन नली में फंसे होने की पुष्टि होते ही डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए बच्ची को ऑपरेशन थिएटर में लिया।

जटिल प्रक्रिया से निकाला बाहर, टला बड़ा खतरा

ईएनटी विभाग के प्रमुख विशेषज्ञ डॉ. ओपी शर्मा और कनिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र सिंह लखावत के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने 'रिजिड इसोफैगोस्कोपी' प्रक्रिया अपनाई और सफलतापूर्वक बैटरी को बाहर निकाल लिया। डॉक्टरों ने बताया कि बटन बैटरी निगलना जानलेवा हो सकता है, क्योंकि इसमें मौजूद केमिकल भोजन नली को जला सकते हैं या उसमें छेद कर सकते हैं। समय पर उपचार मिलने से बच्ची की जान बच गई और अब उसकी स्थिति सामान्य है।

इन जांबाज डॉक्टरों और स्टाफ की रही मुख्य भूमिका

इस सफल ऑपरेशन में ईएनटी विभाग से डॉ. अदिति पारीक, डॉ. अर्पित पाटनी और प्रियंवदा कंजोलिया के साथ-साथ एनेस्थीसिया विभाग के सहायक आचार्य डॉ. महेंद्र बैरवा एवं उनकी टीम का विशेष सहयोग रहा। वहीं, नर्सिंग स्टाफ सत्यनारायण और वार्ड बॉय भंवर कोली ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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