NEET PG: जीरो और नेगेटिव स्कोर पर मिल रहा है टॉप मेडिकल कॉलेज, NBEMS के फैसले पर छिड़ा देशव्यापी विवाद

नई दिल्ल। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) द्वारा नीट पीजी के कटऑफ को घटाने के फैसले ने अब एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है। चिकित्सा जगत के विशेषज्ञों और छात्र संगठनों का आरोप है कि इस फैसले से देश की स्वास्थ्य शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता दांव पर लग गई है।
क्या है पूरा मामला?
नीट पीजी की काउंसलिंग के तीसरे दौर के परिणाम आने के बाद सोशल मीडिया पर आंकड़ों की बाढ़ आ गई है। रिपोर्टों के अनुसार, देश के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में कई ऐसी क्लिनिकल सीटें उन छात्रों को आवंटित की गई हैं, जिन्होंने परीक्षा में मात्र 30 से 40 अंक प्राप्त किए हैं। सबसे चौंकाने वाला दावा यह है कि 800 अंकों की परीक्षा में नेगेटिव (ऋणात्मक) स्कोर करने वाले छात्रों को भी दाखिला मिल रहा है।
लक्ष्य मित्तल और UDF का कड़ा विरोध
यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) के अध्यक्ष लक्ष्य मित्तल ने इस स्थिति को बेहद "परेशान करने वाला" बताया है। उन्होंने सवाल उठाया है कि अगर न्यूनतम योग्यता (मेरिट) को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा, तो भविष्य में डॉक्टरों की कुशलता पर क्या असर पड़ेगा? मित्तल ने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) भी दायर की है, जिसमें मांग की गई है कि कोर्ट तुरंत हस्तक्षेप कर इस प्रक्रिया पर रोक लगाए या नियमों में सुधार करे।
सोशल मीडिया पर आक्रोश
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' और 'फेसबुक' पर डॉक्टर्स और आम नागरिक इसे "शिक्षा व्यवस्था की लापरवाही" करार दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि मेडिकल जैसे संवेदनशील क्षेत्र में जहां लोगों की जान दांव पर होती है, वहां बिना किसी ठोस योग्यता मानक के प्रवेश देना खतरनाक साबित हो सकता है।
फिलहाल, सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वह इस काउंसलिंग प्रक्रिया में दखल देता है या NBEMS अपने फैसले पर कायम रहता है।
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