निपाह वायरस ने फिर जताई मौजूदगी, सावधानी ही है सुरक्षा

निपाह वायरस ने फिर जताई मौजूदगी, सावधानी ही है सुरक्षा
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नई दिल्ली। निपाह वायरस एक बार फिर देश में खतरा बनकर उभर रहा है। पश्चिम बंगाल में हाल ही में इसके मामले सामने आने के बाद चिंता बढ़ गई है। यह ज़ूनोटिक वायरस है, यानी जानवरों से इंसानों में फैलता है, और इसका मुख्य स्रोत फल खाने वाले चमगादड़ माने जाते हैं। संक्रमित जानवरों या उनके संपर्क में आई चीज़ों से यह इंसानों में फैल सकता है। इसके अलावा, संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी संक्रमण फैल सकता है।

कोई वैक्सीन या पूर्ण इलाज नहीं

अभी तक निपाह वायरस के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं है और न ही कोई एंटीवायरल दवा इसे पूरी तरह खत्म कर सकती है। इलाज केवल लक्षणों को नियंत्रित करने तक सीमित है। उदाहरण के लिए बुखार और दर्द को कम करना, सांस लेने में कठिनाई होने पर वेंटिलेटर सपोर्ट देना और दिमाग में सूजन होने पर ICU में इलाज करना। विशेषज्ञों के अनुसार निपाह वायरस से मृत्यु दर 40 से 75 फीसदी तक हो सकती है।

निपाह वायरस के लक्षण

शुरुआती लक्षण आम फ्लू जैसे हो सकते हैं, लेकिन जल्दी ही यह गंभीर रूप ले लेता है।

तेज बुखार

सिरदर्द

उल्टी और चक्कर

सांस लेने में कठिनाई

दिमाग में सूजन (एन्सेफेलाइटिस)

बेहोशी या कोमा

कुछ मामलों में संक्रमण 24–48 घंटे में जानलेवा हो सकता है।

सावधानी ही सबसे बड़ी दवा

चूंकि वैक्सीन और पूर्ण इलाज उपलब्ध नहीं है, इसलिए सावधानी ही सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय है।

बीमार व्यक्ति के संपर्क से बचें।

बिना धोए फल न खाएं।

चमगादड़ों द्वारा खाए गए फल बिल्कुल न खाएं।

संक्रमण के मामलों में आइसोलेशन का पालन करें।

हाथों की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।

निपाह वायरस का सबसे बड़ा खतरा यह है कि इसका कोई इलाज और वैक्सीन नहीं है। इसलिए समय पर पहचान, तुरंत आइसोलेशन और सतर्कता ही जान बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है।

भीलवाडा हलचल न्यूज पोर्टल पर अपनी खबर देने के लिए समाचार प्रेम कुमार गढवाल

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