अब गले और हाथ-पैर की नसों की हो रही एंजियोप्लास्टी

इंदौर : शासकीय अस्पतालों में मरीजों को आधुनिक इलाज की सुविधाएं मिलने लगी हैं। हार्ट के साथ ही अब गले की नस और हाथ-पैर की नसों की एंजियोप्लास्टी हो रही है। इससे मरीजों को लाभ मिल रहा है।यह सुविधा इंदौर स्थित सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के हृदय रोग विभाग में मरीजों को मिल रही है। अब तक यहां 12 मरीजों की गले, हाथ-पैर की नसों की एंजियोप्लास्टी की जा चुकी है।

लकवा होने पर गले की नस की एंजियोप्लास्टी

विशेषज्ञों के अनुसार अब गले, पैर व हाथ की ब्लॉक नसों की एंजियोप्लास्टी हो रही है। इस तकनीक में मरीजों को दर्द कम होता है। नसों को खोलने के लिए मरीज ओपन सर्जरी करवाते हैं, जिसमें उन्हें तकलीफ ज्यादा होती है।

एंजियोप्लास्टी से मरीज को आराम भी जल्द हो जाता है। एसोसिएट प्रोफेसर लोकेंद्र रैकवार ने बताया कि गले की नस की एंजियोप्लास्टी तब होती है जब मरीज को लकवा हो जाता है।

उसकी नस में ब्लॉकेज या फिर खून की सप्लाई कम हो जाती है, इसमें हम विशेष फिल्टर लगाकर एंजियोप्लास्टी करते हैं। इसी तरह हाथ की नसों में खून की नस ब्लाक हो जाती है। पैर में भी नस ब्लाक हो जाती है और पैर नीला पड़ने लग जाता है। ऐसे मरीजों के लिए एंजियोप्लास्टी काफी कारगर है।

मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित सरकारी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में आयुष्मान योजना के मरीजों को यह सुविधा पूरी तरह नि:शुल्क प्रदान की जा रही है। जिन मरीजों के पास आयुष्मान कार्ड नहीं है, उन्हें काफी कम दर में यह सुविधा मिल रही है। निजी अस्पताल में इसी इलाज का खर्च 3 से 4 लाख रुपए आता है। मध्य प्रदेश के रीवा, जबलपुर, भोपाल और इंदौर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल हैं, लेकिन यह सुविधा सिर्फ इंदौर में है।

दर्द नहीं होता, मरीजों की रिकवरी भी जल्द होती है

विनय यादव, इंदौर : शासकीय अस्पतालों में मरीजों को आधुनिक इलाज की सुविधाएं मिलने लगी हैं। हार्ट के साथ ही अब गले की नस और हाथ-पैर की नसों की एंजियोप्लास्टी हो रही है। इससे मरीजों को लाभ मिल रहा है।

यह सुविधा इंदौर स्थित सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के हृदय रोग विभाग में मरीजों को मिल रही है। अब तक यहां 12 मरीजों की गले, हाथ-पैर की नसों की एंजियोप्लास्टी की जा चुकी है।

निजी अस्पताल में आता है तीन-चार लाख रुपये खर्च

गले, हाथ-पैर की नसों की एंजियोप्लास्टी का खर्च निजी अस्पतालों में करीब तीन से चार लाख रुपये आता है, लेकिन सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में आयुष्मान योजना के मरीजों की निशुल्क एंजियोप्लास्टी की जा रही है।

जिन मरीजों के पास आयुष्मान कार्ड नहीं होता है, उन्हें काफी कम दर में यह सुविधा मिल रही है। प्रदेश में रीवा, जबलपुर, भोपाल और इंदौर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल संचालित हो रहे हैं, लेकिन यह सुविधा वर्तमान में सिर्फ इंदौर में ही मिल रही है।

समय पर इलाज करवाना जरूरी

विशेषज्ञों के मुताबिक, नसों में थक्का अथवा कोलेस्ट्रॉल जमने से खून की सप्लाई प्रभावित होती है। नसें भी सिकुड़ जाती हैं। इससे चलने व कुछ काम करने के दौरान दर्द होने लगता है। कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। समय पर इलाज नहीं करवाने से खून की सप्लाई नहीं होती है।


इसके अलावा हाथ-पैर नीले पड़ने लगते हैं। ऐसी स्थिति में पैर व हाथ को काटने तक की नौबत आ जाती है। समय पर मरीज जागरूक हो जाए तो उसे आराम मिल जाता है।

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