दिन-रात किताबों के सामने बैठे रहने पर भी बच्चों को चीजें नहीं रहती याद? अपनाएं ये तरीके

दिन-रात किताबों के सामने बैठे रहने पर भी बच्चों को चीजें नहीं रहती याद? अपनाएं ये तरीके
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हर माता-पिता की यह चाहत होती है कि उनका बच्चा जीवन में काफी तरक्की करे और सफलता हर कदम पर उसके साथ चले. अपनी इस इच्छा को पूरा करने के लिए पैरेंट्स अपने बच्चों को हर सुख-सविधा मुहैय्या कराते हैं. कई बार ऐसा होता है कि बच्चे खुद भी पढ़ना चाहते हैं लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद भी उन्हें चीजें याद नहीं रहती है. वे दिनभर किताबों के सामने बैठे रहते हैं और चीजों को याद करने की कोशिश करते रहते हैं. ऐसे में जब पैरेंट्स अपने बच्चों को संघर्ष करते देखते हैं तो उनके मन में भी बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता सताने लगती है. आज की यह आर्टिकल भी उन्हीं पैरेंट्स के लिए है जिनके बच्चों को चीजों को याद रखने में काफी परेशानी होती है. आज हम आपको कुछ ऐसे तरीके बताने जा रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप अपने बच्चों को चीजों को याद रखने में मदद कर पाएंगे. तो चलिए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं.

छुड़ाएं ये एक आदत

जब बात चीजों को याद रखने की आती है तो ऐसे में पैरेंट्स सबसे बड़ी जो गलती करते हैं वह है बच्चों को चीजों को रटाने की. जब आपके बच्चे चीजों को सिर्फ रटते हैं तो उन्हें वह चीज ज्यादा देर तक याद नहीं रह जाती है. रटी हुई चीजों को वे काफी जल्दी भूल जाते हैं. रटने से बेहतर है कि आपके बच्चे चीजों को या फिर टॉपिक को बेहतर तरीके से समझे.

टॉपिक को करें रोचक बनाने की कोशिश

अगर आपके बच्चे का मन किसी विषय में या फिर टॉपिक को पढ़ने में न लगे तो आपको उस विषय को उसके लिए रोचक बनाने की कोशिश करनी चाहिए. जब आप ऐसा करेंगे तो आपके बच्चे का मन उस टॉपिक को पढ़ने में जरूर लगेगा.

पर्याप्त नींद जरूरी

अगर आप चाहते हैं कि आपके बच्चे पढ़ी हुई चीजों को याद रखे तो ऐसे में आपको उनके नींद का भी ख्याल रखना चाहिए. कोशिश करें कि आपके बच्चे को हर रात कम से कम 7 से 8 घंटों की नींद जरूर मिले. जब उसकी नींद पूरी होती है तो उसका दिमाग बेहतर तरीके से काम करता है.

खेलने-कूदने से न रोकें

कुछ पैरेंट्स की यह आदत होती है कि वे अपने बच्चों को खेलने पर डांटते हैं और दिनभर उनसे पढ़ाई करने को ही कहते रहते हैं. अगर आप भी ऐसा करते हैं तो यह बहुत ही गलत बात है. अगर आपका बच्चा खेल रहा है तो पहले उसे खेल लेने दीजिए. खेलने-कूदने के बाद आपके बच्चे का मूड फ्रेश हो जाता है और उसे पढ़ाई में भी मन लगने लगता है.

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