अशांत मन और गहराता मानसिक संकट, कहीं आप भी तो नहीं हैं 'कार्टिसोल' के जाल में?

छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग्स, और काम में एकाग्रता की कमी—ये केवल स्वभाव की विशेषताएं नहीं, बल्कि आपके अशांत मन के खतरे के संकेत हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और मशीनों पर बढ़ती निर्भरता ने हमें 'आत्मकेंद्रित' बना दिया है, जिससे हमारा भावनात्मक सपोर्ट सिस्टम लगातार कमजोर हो रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की चेतावनी: एक वैश्विक आपदा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) मानसिक स्वास्थ्य को एक 'आपदा' घोषित कर चुका है। आंकड़े डराने वाले हैं; दुनिया भर में एक अरब से अधिक लोग मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। भारत में भी स्थिति चिंताजनक है। डेटा फार्मारैक के अनुसार, देश में एंटीडिप्रेसेंट (अवसाद रोधी) दवाओं का बाजार 2020 में 1,540 करोड़ रुपये से बढ़कर नवंबर 2024 तक 2,536 करोड़ रुपये हो गया है। यानी पिछले चार वर्षों में इन दवाओं का इस्तेमाल 64 प्रतिशत तक बढ़ गया है।
समझें कार्टिसोल का खेल और मन की 'एंटीबॉडीज'
एम्स दिल्ली के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. नंद कुमार के अनुसार, जब हम लगातार तनाव में रहते हैं, तो शरीर में 'कार्टिसोल' (Stress Hormone) का स्तर बढ़ जाता है। यह न केवल मांसपेशियों को नुकसान पहुँचाता है, बल्कि मोटापा और इंसुलिन रेजिस्टेंस का कारण भी बनता है। हंगरी के प्रोफेसर एटिलिया ओलाह का मानना है कि जैसे शरीर के लिए एंटीबॉडीज जरूरी हैं, वैसे ही मन के पास भी 16 रक्षात्मक संसाधन (Antibodies) होते हैं। इनमें सकारात्मक सोच, स्थिति नियंत्रण की समझ और भावनाओं को संतुलित करने की क्षमता शामिल है।
इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
नींद का बार-बार खुलना, बहुत अधिक या बहुत कम सोना।
गर्दन, पीठ या कमर में लगातार दर्द की शिकायत।
खुद को हीन या व्यर्थ समझना और भविष्य के प्रति निराशा।
सांस लेने में तकलीफ और निरंतर मूड में बदलाव।
थोड़ा प्रयास, बड़ा प्रभाव: कैसे सुधारें मानसिक सेहत?
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक समस्याओं को छिपाने के बजाय शारीरिक बीमारी की तरह साझा करना चाहिए। कुछ छोटे बदलाव बड़ा अंतर ला सकते हैं:
माइंडफुलनेस: मन को वर्तमान में केंद्रित करने का अभ्यास करें।
सक्रिय दिनचर्या: जॉगिंग या स्विमिंग जैसी एरोबिक एक्सरसाइज करें, जिससे 'एंडोर्फिन' (Endorphin) जैसे हैप्पी हार्मोन्स बढ़ें।
पर्याप्त नींद: कार्टिसोल के स्तर को कम करने के लिए गहरी नींद और स्वस्थ खानपान अनिवार्य है।
संवाद: अपनों से मन की बात कहें और दूसरों को धैर्य से सुनें। कई बार केवल 'सुनना' ही उपचार का पहला कदम होता है।
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