जीवन दर्शन: क्या आपका मित्र भरोसे लायक है? चाणक्य की इन 4 कसौटियों पर परखें दोस्ती

आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति शास्त्र में जीवन के हर पहलू पर सटीक मार्गदर्शन दिया है। मित्रता एक ऐसा रिश्ता है जो इंसान खुद चुनता है, लेकिन गलत चुनाव जीवन भर का दुख बन सकता है। चाणक्य ने सच्चे मित्र की पहचान के लिए कुछ ऐसी 'कसौटियां' बताई हैं, जिनसे आप जान सकते हैं कि आपका मित्र संकट में साथ देगा या नहीं।
1. संकट के समय परखें (आपदासु मित्रं जानीयात्)
चाणक्य के अनुसार, सच्चे मित्र की पहचान शांति के समय नहीं, बल्कि विपत्ति के समय होती है। जब आप आर्थिक संकट, बीमारी या किसी बड़ी मुसीबत में हों, तब जो व्यक्ति आपके साथ खड़ा रहता है, वही आपका असली मित्र है। जो सुख में साथ रहे और दुख आते ही किनारा कर ले, उससे दूरी बनाना ही बेहतर है।
2. धन के लेन-देन में ईमानदारी
दोस्ती में दरार का सबसे बड़ा कारण अक्सर धन होता है। चाणक्य कहते हैं कि अगर आपको किसी मित्र के चरित्र को परखना है, तो उसे धन की जिम्मेदारी सौंपकर देखें। जो व्यक्ति पैसे के लालच में आकर आपके साथ विश्वासघात न करे और पाई-पाई का हिसाब साफ रखे, वही भरोसे के काबिल है।
3. कठिन समय की सलाह
एक सच्चा मित्र वही है जो आपको केवल वही न बोले जो आपको सुनना अच्छा लगता है, बल्कि वह बोले जो आपके लिए सही है। अगर आपका मित्र गलत रास्ते पर जाते समय आपको टोकता है और कड़वा सच बोलकर आपको बड़ी मुसीबत से बचाता है, तो वह वास्तव में आपका हितैषी है।
4. व्यवहार और गोपनीयता
चाणक्य के अनुसार, जो मित्र आपके सामने आपकी प्रशंसा करे और आपकी पीठ पीछे आपकी बुराई या आपके राज (Secret) दूसरों को बताए, वह विष भरे घड़े के समान है। भरोसेमंद मित्र वही है जो आपकी गोपनीय बातों को हमेशा सुरक्षित रखे और समाज में आपके सम्मान की रक्षा करे।
