दालों को भिगोने का सही समय: चना, मूंग या उड़द? न्यूट्रिशनिस्ट से जानें पोषण पाने का सही तरीका

दालों को भिगोने का सही समय: चना, मूंग या उड़द? न्यूट्रिशनिस्ट से जानें पोषण पाने का सही तरीका
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भारतीय रसोई में दालें प्रोटीन का मुख्य स्रोत मानी जाती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन्हें बनाने से पहले भिगोना क्यों जरूरी है? न्यूट्रिशनिस्ट के अनुसार, दालों में 'फाइटिक एसिड' (Anti-nutrients) होता है जो शरीर में आयरन और जिंक के अवशोषण को रोकता है। सही समय तक भिगोने से न केवल दाल जल्दी पकती है, बल्कि इसके पोषक तत्व भी शरीर को पूरी तरह मिलते हैं।

किस दाल को कितनी देर भिगोना है सही?

विभिन्न दालों की बनावट और उनके पकने के समय के आधार पर भिगोने का समय भी अलग-अलग होता है:

साबुत दालें (जैसे राजमा, छोले, काला चना):

इन्हें सबसे अधिक समय की आवश्यकता होती है। इन्हें कम से कम 8 से 12 घंटे या रात भर भिगोना चाहिए। इससे इनके ऊपर का सख्त छिलका नरम होता है और गैस (bloating) की समस्या नहीं होती।

उड़द और मूंग की साबुत दाल:

साबुत उड़द या हरी मूंग को कम से कम 4 से 6 घंटे भिगोना पर्याप्त होता है।

धुली हुई और टूटी दालें (जैसे पीली मूंग, मसूर, अरहर):

इन दालों को बहुत ज्यादा समय नहीं चाहिए। इन्हें बनाने से महज 30 से 45 मिनट पहले भिगोना काफी है। इससे इनकी बनावट और स्वाद बेहतर हो जाता है।

भिगोने के 3 बड़े फायदे

पाचन में आसानी: भिगोने से दालों में मौजूद जटिल शर्करा टूट जाती है, जिससे पेट फूलने और गैस जैसी समस्याएँ नहीं होतीं।

पोषक तत्वों की वृद्धि: अंकुरण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही भिगोने से विटामिन और मिनरल्स की उपलब्धता बढ़ जाती है।

समय और ईंधन की बचत: भीगी हुई दालें 25% से 30% जल्दी पकती हैं, जिससे रसोई में गैस और समय दोनों की बचत होती है।

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