हरियाणा की पूर्व सरपंच और जिला उपाध्यक्ष माया देवी ने राजस्थान में दी जान – क्या पार्टी की 'अंदरूनी साजिश' ने तोड़ा एक परिवार?

हरियाणा की पूर्व सरपंच और जिला उपाध्यक्ष माया देवी ने राजस्थान में दी जान – क्या पार्टी की अंदरूनी साजिश ने तोड़ा एक परिवार?
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सीकर, : भाजपा का 'महिला मोर्चा' जो खुद को महिलाओं की 'रक्षक' बताता है, आज अपनी ही एक प्रमुख नेता की मौत पर सवालों के घेरे में है। हरियाणा के नारनौल निवासी निवाजनगर गांव की पूर्व सरपंच और BJP महिला मोर्चा महेंद्रगढ़ की जिला उपाध्यक्ष माया देवी ने राजस्थान के सीकर जिले के डाबला के जीलो गांव में मालगाड़ी के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली। सुबह 8 बजे घर से बिना किसी को बताए निकलीं माया देवी ने रेवाड़ी जा रही ट्रेन के ठीक सामने दोनों हाथ फैलाकर पटरी पर खड़े होकर अपनी जिंदगी खत्म कर दी। क्या यह सिर्फ एक 'व्यक्तिगत त्रासदी' है, या BJP की आंतरिक राजनीति और 'महिला नेतृत्व' की खोखली चमक का परिणाम? सवाल उठ रहे हैं – पार्टी ने अपनी ही महिला नेता को कितना 'सशक्त' बनाया कि वह मौत को गले लगा ले?

पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सोशल मीडिया पर मृतका की फोटो वायरल कर पहचान की अपील की। नारनौल के सोशल मीडिया ग्रुप्स में फोटो फैलते ही माया देवी की पहचान हो गई। 50 वर्षीय माया देवी BJP की कट्टर और सक्रिय कार्यकर्ता थीं – पूर्व सरपंच रह चुकीं, महिला मोर्चा की जिला उपाध्यक्ष के रूप में उन्होंने महेंद्रगढ़ जिले में पार्टी की 'महिला विंग' को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। लेकिन सवाल यह है: क्या पार्टी पदों की 'जंग' और 'अंदरूनी गुटबाजी' ने उन्हें इतना तोड़ दिया कि वह राजस्थान की पटरी पर आकर समाप्त हो गईं? माया देवी के राजनीतिक सफर पर नजर डालें तो साफ दिखता है – ग्राम स्तर से जिला स्तर तक की मेहनत, लेकिन ऊपर पहुंचते ही 'पुरुष-प्रधान' BJP में महिलाओं का वही पुराना हाल: इस्तेमाल, फिर फेंक दो!

घटना के पीछे का काला सच अभी पूरी तरह सामने नहीं आया, लेकिन जो बिखरे टुकड़े हैं, वे BJP की 'महिला सशक्तिकरण' की पोल खोलते हैं। माया देवी के लापता होने की रिपोर्ट उनके बेटे ने बुधवार को ही नारनौल थाने में दर्ज कराई थी। पुलिस जांच में पता चला कि वह सुबह घर से 'कहीं घूमने' निकली थीं, लेकिन सीधे सीकर पहुंचीं – 200 किलोमीटर दूर! क्यों? क्या घरेलू कलह था, या पार्टी के 'वरिष्ठ नेताओं' की ओर से दबाव? स्थानीय सूत्रों का दावा है कि माया देवी हाल ही में BJP महिला मोर्चा के आंतरिक चुनावों में 'उपेक्षित' महसूस कर रही थीं। महेंद्रगढ़ जिले में पार्टी के कुछ 'बड़े भाई' नेताओं ने उन्हें 'अवांछित' ठहराया था – पद की होड़ में महिलाओं को 'साइडलाइन' करना BJP का पुराना 'फॉर्मूला' तो है ही! याद कीजिए, उत्तराखंड में BJP महिला मोर्चा की पूर्व जिला अध्यक्ष पर अपनी ही बेटी का यौन शोषण कराने का आरोप लगा, और पार्टी ने बस 'निष्कासन' कर दिया – कोई जांच, कोई सहारा? माया देवी का केस भी वैसा ही लगता है: एक महिला नेता, जो पार्टी के 'सामने' खड़ी हो गई, तो 'पटरी पर उतार' दिया गया!

परिजनों का दर्द देखिए – बेटे ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन जब शव मिला तो पूरा परिवार टूट गया। गुरुवार को परिजन नीम का थाना पहुंचे, जहां पोस्टमार्टम के बाद शव सौंप दिया गया। अंतिम संस्कार नारनौल में हुआ, लेकिन सवाल बाकी: माया देवी के पति और परिवार ने पुलिस को बताया कि वह 'मानसिक तनाव' में थीं, लेकिन कारण? क्या BJP की 'महिला मोर्चा' में महिलाओं को सिर्फ 'चुनावी मोहरे' बनाकर इस्तेमाल किया जाता है? महेंद्रगढ़ BJP के एक पूर्व कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "माया जी को पद मिला था, लेकिन गुटबाजी ने तोड़ दिया। पार्टी में महिलाओं की आवाज दबाई जाती है – सशक्तिकरण का नारा तो बस वोट के लिए!" BJP महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष वनथी श्रीनिवासन ने 'दुख व्यक्त' किया, लेकिन कोई जांच की घोषणा? शून्य! राजस्थान BJP के प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी ने भी सिर्फ 'शोक संदेश' जारी किया – जैसे हर बार, 'महिला नेता की मौत' पर बस 'कंडोलेंस', कोई जवाबदेही नहीं!

यह घटना BJP के पूरे 'महिला एजेंडे' पर करारा तमाचा है। पार्टी जो 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का झंडा लहराती है, वही अपनी ही 'बेटी' को पटरी पर धकेल देती है? सीकर SP राजेंद्र सिंह ने बताया कि मामला 'सुसाइड' का ही लगता है, कोई सुसाइड नोट नहीं मिला, लेकिन फॉरेंसिक जांच जारी है। लेकिन असली जांच तो BJP को खुद करनी चाहिए: महिला मोर्चा में कितनी महिलाएं 'सुरक्षित' हैं? हाल के वर्षों में BJP से जुड़ी कई महिला नेताओं की मौतें संदिग्ध रही हैं – हर बार 'व्यक्तिगत कारण', लेकिन कभी 'पार्टी की भूमिका' पर सवाल? नहीं! विपक्ष ने हमला बोला है – कांग्रेस ने कहा, "BJP की 'महिला सशक्तिकरण' एक धोखा है। माया देवी की मौत पर CBI जांच होनी चाहिए!" क्या BJP सुनेगी, या फिर 'महिला मोर्चा' को बस 'चुनावी स्टंट' बनाए रखेगी?


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