प्रशासन को खेत-खलिहानों तक ले जाने की पहल लाई रंग, अब दूसरा चरण सोमवार से:

प्रशासन को खेत-खलिहानों तक ले जाने की पहल लाई रंग, अब दूसरा चरण सोमवार से:
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राजसमन्द। गत वर्ष 24 जून को जिला कलक्टर के रूप में पदभार संभालने के बाद अरुण कुमार हसीजा ने प्रशासन की कार्यशैली को जनोन्मुख बनाने की स्पष्ट दिशा तय कर दी थी।

पदभार ग्रहण करने के बाद पहली ही रात्रि चौपाल में सामने आए एक दृश्य ने यह संदेश दे दिया कि यह प्रशासन बराबरी, सम्मान और संवेदनशीलता के साथ काम करेगा। अधिकारी कुर्सियों पर बैठे थे और आमजन जमीन पर—इस असमानता पर जिला कलक्टर ने तत्काल नाराजगी व्यक्त करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि जब तक आमजन के लिए कुर्सियों की व्यवस्था न हो, तब तक अधिकारी भी जमीन पर ही बैठेंगे। यही सोच आगे चलकर जिले में प्रशासन और किसानों के रिश्ते की मजबूत बुनियाद बनी।

कुछ ही समय बाद यह तथ्य सामने आया कि भारत सरकार के एग्रीस्टेक अभियान के अंतर्गत जिले में फार्मर रजिस्ट्री की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर है। किसान योजनाओं के पात्र तो थे, लेकिन पंजीयन के अभाव में लाभ से वंचित रह जा रहे थे। इसी चुनौती को अवसर में बदलते हुए जिले में 1 जनवरी 2026 से 17 जनवरी 2026 तक “कृषक अधिकार पंजीयन पखवाड़ा” का आयोजन किया गया, जिसके अपेक्षा से बेहतर परिणाम सामने आये।

किसान को नहीं, प्रशासन को खेत तक ले जाने की पहल:

इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि किसान को कार्यालय बुलाने के बजाय प्रशासन स्वयं किसान तक पहुँचा। यह स्वीकार किया गया कि किसान दिनभर खेतों में व्यस्त रहता है और उसके लिए बार-बार ई-मित्र या कार्यालय पहुँचना सहज नहीं होता। इसी सोच के तहत जिले के सभी पटवारी प्रतिदिन सायं 4 बजे से रात्रि 8 बजे तक अपने-अपने हल्कों के राजस्व गांवों के फिल्ड में पहुँचे।

खेत, घर, चौराहा, चबूतरा, मंदिर—जहाँ किसान सहज रूप से उपलब्ध हो सका, वहीं मौके पर फार्मर रजिस्ट्री की गई। मोबाइल, आवश्यक दस्तावेज और नेटवर्क व्यवस्था के साथ अधिकारी स्वयं उपस्थित रहे और किसानों का सम्मानपूर्वक पंजीयन किया गया। यह दृश्य जिले में नया था—सरकार पहली बार सचमुच किसान के दरवाजे तक पहुँची।

15 दिनों में 15,373 नई फार्मर रजिस्ट्री:

इस संवेदनशील और सक्रिय पहल के परिणाम भी उतने ही प्रभावशाली रहे। मात्र 15 दिनों में जिले में 15,373 किसानों की नई फार्मर रजिस्ट्री पूर्ण की गई। इससे न केवल जिले की एग्रीस्टेक प्रगति को गति मिली, बल्कि किसानों का प्रशासन पर भरोसा भी मजबूत हुआ। जिन किसानों को पहले योजनाएं कागजों तक सीमित लगती थीं, उन्होंने पहली बार अपने अधिकारों को धरातल पर उतरते देखा।

ब्लॉकवार फार्मर रजिस्ट्री उपलब्धि:

पखवाड़े के दौरान ब्लॉकवार फार्मर रजिस्ट्री की उपलब्धि इस प्रकार रही—

सरदारगढ़ 1388, आमेट 1565, कुंवारिया 1166, नाथद्वारा 1532, कुंभलगढ़ 1356, डेलवाड़ा 707, देवगढ़ 1604, खमनोर 1052, भीम 1877, गढ़बोर 891, राजसमन्द 993 एवं रेलमगरा 1242। इस प्रकार जिले में कुल 15,373 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री की गई।

दूसरा चरण सोमवार से:

कृषक अधिकार पंजीयन पखवाड़े के प्रथम चरण में फार्मर रजिस्ट्री के अपेक्षित एवं उत्साहजनक परिणाम प्राप्त हुए हैं। इस उपलब्धि के लिए जिला कलक्टर ने जिले के समस्त राजस्व अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सराहना की। जिला कलक्टर ने 19 जनवरी से कृषक अधिकार पंजीयन पखवाड़े के द्वितीय चरण की घोषणा करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि द्वितीय चरण की समाप्ति के पश्चात जिले के शत-प्रतिशत किसानों की फार्मर रजिस्ट्री पूर्ण करने के लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल किया जाएगा।

सर्वश्रेष्ठ तीन पटवारियों को गणतंत्र दिवस पर जिला स्तर पर करेंगे सम्मानित :कलक्टर

जिला कलक्टर ने बताया कि उत्कृष्ट कार्य को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रथम चरण में सर्वश्रेष्ठ कार्य करने वाले तीन पटवारियों को जिला स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में सम्मानित किया जाएगा। वहीं प्रत्येक उपखण्ड स्तर पर सर्वश्रेष्ठ कार्य करने वाले एक-एक पटवारी को उपखण्ड स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में सम्मान प्रदान किया जाएगा। इससे न केवल कार्मिकों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि अभियान को और अधिक गति भी मिलेगी।

कृषक अधिकार पंजीयन पखवाड़ा केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं रहा, बल्कि यह इस बात का जीवंत उदाहरण बना कि यदि प्रशासन संवेदनशीलता के साथ जमीन पर उतरकर काम करे, तो व्यवस्था बदली जा सकती है। घर-घर और खेत-खेत जाकर सेवा देने की यह पहल जिलेभर में सराही गई और सुशासन व जनसेवा का एक अनुकरणीय मॉडल बनकर सामने आई।

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