​राजस्थान हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: नाता विवाह से जुड़ी दूसरी पत्नी भी पारिवारिक पेंशन की हकदार

​राजस्थान हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: नाता विवाह से जुड़ी दूसरी पत्नी भी पारिवारिक पेंशन की हकदार
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​जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने एक नजीर पेश करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई महिला वैधानिक रूप से मृतक सरकारी कर्मचारी की पत्नी है, तो उसे पारिवारिक पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता, भले ही वह दूसरी पत्नी हो। अदालत ने राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित 'नाता विवाह' को कानूनी मान्यता देते हुए इसे पेंशन का वैध आधार माना है।

​मामले की मुख्य बातें:

​जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने यह फैसला राम प्यारी सुमन की याचिका पर सुनाया। याचिकाकर्ता के पति पूरन लाल सैनी, जो पटवारी पद पर कार्यरत थे, उनका वर्ष 2020 में निधन हो गया था।

​अदालत का तर्क: कोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 7 के अनुसार, यदि विवाह समुदाय की परंपराओं (जैसे नाता प्रथा) से संपन्न हुआ है, तो वह वैध है।

​स्वीकारोक्ति बनी आधार: मृतक कर्मचारी ने अपने जीवनकाल में पारिवारिक न्यायालय में गवाही के दौरान याचिकाकर्ता को अपनी पत्नी स्वीकार किया था, जिसे हाईकोर्ट ने निर्णायक साक्ष्य माना।

​सरकार की दलील खारिज: राज्य सरकार ने दलील दी थी कि सेवा रिकॉर्ड में नाम दर्ज न होने के कारण पेंशन नहीं दी जा सकती, जिसे कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि केवल नामांकन (Nomination) न होने से वैध पत्नी का हक खत्म नहीं होता।

​हाईकोर्ट ने अब राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता को जल्द से जल्द पारिवारिक पेंशन और समस्त वैधानिक लाभ प्रदान किए जाएं।

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