'धरती आबा अभियान' में अब ग्राम सभाएं खुद तय करेंगी विकास का रोडमैप, उदयपुर सांसद के सुझाव को केंद्र की मंजूरी

उदयपुर। जनजातीय क्षेत्रों के कायाकल्प के लिए शुरू किए गए 'धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान' (DAJGUA) में अब एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब विकसित जनजाति ग्राम का पूरा प्लान खुद ग्राम सभा में तैयार होगा, जिसके लिए गांवों में विशेष ग्राम सभाएं बुलाई जाएंगी। लोकसभा में गुरुवार को सांसद डॉ. मन्नालाल रावत द्वारा रखे गए इस महत्वपूर्ण सुझाव पर जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने अपनी सहमति दे दी है।
राजस्थान के 6019 गांवों की बदलेगी तस्वीर
इस अभियान का असर राजस्थान में बड़े स्तर पर देखने को मिलेगा। प्रदेश के 30 जिलों के 208 ब्लॉकों में आने वाले 6019 गांवों को इस अभियान में शामिल किया गया है। लक्ष्य है—सुविधाओं और मानव संसाधन विकास के लक्ष्यों को 100% पूरा करना।
अभियान की मुख्य बातें:
बजट: अगले 5 वर्षों के लिए कुल 79,156 करोड़ रुपये का प्रावधान। (केंद्र: 56,333 करोड़, राज्य: 22,823 करोड़)।
व्यापकता: देश के 30 राज्यों के 549 जिलों के 63,843 गांव कवर होंगे।
समन्वय: भारत सरकार के 17 मंत्रालय मिलकर 25 तरह के सुधार कार्य करेंगे।
प्राथमिकता: स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छ पेयजल, पक्के मकान और रोजगार के अवसर बढ़ाना।मेवाड़-वागड़ में काम शुरू, हजारों मकान स्वीकृत
राजस्थान के उदयपुर, सलूंबर, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ जिलों में विकास कार्यों ने रफ्तार पकड़ ली है:
पेयजल: जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, चिन्हित 2038 गांवों में से 1850 में पानी की सप्लाई का काम पूरा हो चुका है।
आवास: ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बड़ी राहत देते हुए डूंगरपुर में 6076, प्रतापगढ़ में 2793, सलूंबर में 9092 और उदयपुर में 2218 पक्के मकानों को मंजूरी दी है।
कनेक्टिविटी: दूरसंचार विभाग द्वारा उदयपुर संभाग के सैकड़ों गांवों में मोबाइल नेटवर्क की पहुंच सुनिश्चित की गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2 अक्टूबर 2024 को शुरू किया गया यह अभियान आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की कमियों को दूर करने के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है।
