विधायक बालमुकुंद आचार्य ने फिर उठाया लाउडस्पीकर का मुद्दा; बोले- 'ध्वनि प्रदूषण से लोग शहर छोड़ने को मजबूर'

जयपुर| हवामहल विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य ने एक बार फिर मस्जिदों और मदरसों में लगे लाउडस्पीकरों की तेज आवाज को लेकर मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में विधायक ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि लाउडस्पीकर की आवाज को निर्धारित सीमा में नियंत्रित नहीं किया गया, तो आमजन मजबूरी में पलायन करने को विवश हो जाएंगे।
"धर्म के खिलाफ नहीं, शोर के खिलाफ है आवाज"
विधायक आचार्य ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी विशेष मजहब या इबादत के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह आम नागरिकों की सेहत और शांति से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा, "कांग्रेस शासनकाल में कई मस्जिदें बनीं, हर किसी को अपने धर्म के अनुसार पूजा-पाठ का अधिकार है, लेकिन हर मंजिल पर 8-10 लाउडस्पीकर लगाकर दूसरों की शांति भंग करना गलत है।"
बीमारों और विद्यार्थियों की बढ़ी परेशानी
विधायक ने क्षेत्र के हालातों का जिक्र करते हुए कहा कि:
शिक्षा में बाधा: क्षेत्र के बच्चे लगातार शिकायत कर रहे हैं कि शोर के कारण वे पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं।
स्वास्थ्य पर असर: माइग्रेन और दिल की बीमारियों से जूझ रहे बुजुर्गों के लिए यह तेज आवाज जानलेवा साबित हो रही है।
नियमों में भेदभाव क्यों?: उन्होंने सवाल उठाया कि जब हिंदू समाज के सत्संग, भजन और धार्मिक कार्यक्रमों को रात 10 बजे के बाद बंद करवा दिया जाता है, तो यही नियम सभी धार्मिक स्थलों पर समान रूप से लागू क्यों नहीं हो रहे?
पलायन की दी चेतावनी
बालमुकुंद आचार्य ने प्रशासन से मांग की है कि ध्वनि प्रदूषण के मानकों का सख्ती से पालन करवाया जाए। उन्होंने कहा कि शोर के कारण लोगों का अपने ही घरों में रहना दूभर हो गया है और स्थिति नहीं सुधरी तो लोग शहर छोड़ने पर मजबूर होंगे।
समाचार अपडेट: प्रेम कुमार गढवाल (भीलवाड़ा हलचल)
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