आदिवासियों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध प्रदेश सरकार- खराड़ी

जयपुर/उदयपुर, । जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के आदिवासियों के समग्र उत्थान के लिए दृढ़ संकल्पित है। आदिवासी बहुल क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत ढांचा, कौशल विकास एवं रोजगार सृजन को प्राथमिकता देते हुए विभिन्न योजनाओं और अभियानों के माध्यम से निरंतर प्रगति सुनिश्चित की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि बजट सत्र के दौरान सदन ने विभाग की 381 अरब 99 करोड़ 72 लाख 27 हजार रुपए की अनुदान मांगों को ध्वनिमत से पारित किया है।
दो वर्षों में 346 करोड़ से अधिक के 2593 विकास कार्य पूर्ण-
मंत्री श्री खराड़ी ने बताया कि जनजाति भागीदारी योजना के तहत गत दो वर्षों में 346 करोड़ रुपए से अधिक की राशि से 2,593 विकास कार्य पूर्ण कराए गए हैं। वहीं, ‘धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान’ के अंतर्गत राज्य के 37 जिलों के 6,019 गांवों में समग्र विकास कार्य किए जा रहे हैं। पिछले वर्ष 15 जून से 15 जुलाई तक चले विशेष अभियान के दौरान अनुसूचित जनजाति बहुल गांवों में आधारभूत संरचना, कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, स्वास्थ्य एवं रोजगार से जुड़ी योजनाओं का व्यापक क्रियान्वयन किया गया। अभियान के प्रभावी संचालन के लिए राजस्थान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी प्राप्त हुआ।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार पर जोर-
उन्होंने बताया कि 83 करोड़ रुपए की लागत से अनुसूचित जनजाति विद्यार्थियों के लिए संचालित छात्रावासों के मरम्मत एवं उन्नयन कार्य कराए जा रहे हैं। ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ के माध्यम से 26 जिलों में आदिवासी युवाओं को विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, ताकि योजनाओं का जमीनी स्तर पर बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
5093 गांवों में ‘आदि सेवा केंद्र’ स्थापित-
प्रदेश के 5,093 गांवों में ‘आदि सेवा केंद्र’ स्थापित किए गए हैं, जो एकल खिड़की नागरिक सेवा केंद्र के रूप में कार्य कर रहे हैं। इनके माध्यम से आदिवासी नागरिकों को सरकारी योजनाओं की जानकारी, शिकायत निवारण और त्वरित राहत की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
जनजातीय समुदायों की संस्कृति, विरासत और बलिदान को सम्मान देने के उद्देश्य से महान स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ मनाया जा रहा है। 15 नवंबर 2024 से 15 नवंबर 2025 तक ‘जनजातीय गौरव वर्ष’ के रूप में विविध सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया गया।
‘सौंध माटी आदि धरोहर प्रलेखन योजना’ के तहत जनजातीय वाद्य यंत्रों, पारंपरिक व्यंजनों, आस्था स्थलों, ऐतिहासिक धरोहरों, चित्रकला, काष्ठ एवं प्रस्तर कला, लोकनृत्य एवं गायन का दस्तावेजीकरण और संरक्षण किया जा रहा है।
आदिवासी संस्कृति का प्रचार-प्रसार-
आदिवासी संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए गत वर्ष 15 से 17 सितंबर तक उदयपुर में ‘नेशनल ट्राइबल फूड फेस्टिवल’ का आयोजन किया गया, जिसमें आदिवासी व्यंजनों और पारंपरिक खानपान को व्यापक पहचान मिली।
आदिवासी बेटियों को फ्री कोचिंग, वनाधिकार पट्टों के लिए प्रकोष्ठ गठित-
स्वास्थ्य के क्षेत्र में एनीमिया से पीड़ित मरीजों के उपचार हेतु टोल फ्री नंबर जारी किए गए हैं। कॉल प्राप्त होने पर एंबुलेंस मरीज को घर से अस्पताल तक लाकर उपचार सुनिश्चित करती है। साथ ही, 11वीं कक्षा में अध्ययनरत आदिवासी बालिकाओं को निःशुल्क कोचिंग सुविधा प्रदान की जा रही है। वन क्षेत्रों में निवासरत आदिवासियों को पट्टा वितरण प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए जिला एवं राज्य स्तर पर प्रकोष्ठ गठित किए गए हैं।
