उदयपुर 'वीडियोकांड' पर भाजपा का 'होल्ड एंड रिप्लेस' प्लान: बदनामी से बचने के लिए सीधे एक्शन के बजाय धीरे-धीरे हटाए जाएंगे पदाधिकारी


उदयपुर/जयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर में बहुचर्चित तथाकथित वीडियोकांड ‘उदयपुर फाइल्स’ ने प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस मामले में अपनी छवि बचाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शीर्ष नेतृत्व ने अब 'होल्ड एंड रिप्लेस' की रणनीति अपनाई है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने तय किया है कि दागी पदाधिकारियों से सीधे इस्तीफे मांगकर मामले को तूल देने के बजाय, अगले क्वार्टर तक उन्हें उनके पदों पर बनाए रखा जाएगा और फिर धीरे-धीरे पूरी रणनीति के तहत उन्हें नए चेहरों से बदल दिया जाएगा।

पार्टी की छवि बचाने की कवायद

11 फरवरी को उदयपुर के भूपालपुरा थाने में एक महिला नेता द्वारा वकील पर एआई के जरिए अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का मामला दर्ज कराया गया था। हालांकि, चर्चाएं हैं कि इस वीडियोकांड में संगठन के कई बड़े पदाधिकारी भी आपत्तिजनक स्थिति में शामिल हैं। यदि पार्टी अभी सीधे एक्शन लेती है, तो जनता के बीच गलत संदेश जाएगा कि इन पदाधिकारियों की वाकई संलिप्तता थी। इसीलिए, सिर्फ उदयपुर ही नहीं बल्कि राजस्थान के अन्य कई जिलों में भी फेरबदल की तैयारी है, ताकि यह एक सामान्य संगठनात्मक बदलाव का हिस्सा लगे।

संघ की पैनी नजर और चारित्रिक रिपोर्ट

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भी इस पूरे घटनाक्रम को बेहद गंभीरता से लिया है। संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने क्षेत्रीय स्तर पर इस मामले की पूरी फीडबैक ली है। बताया जा रहा है कि संघ ने केंद्रीय नेतृत्व को स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि अन्य विषयों पर सफाई का मौका दिया जा सकता है, लेकिन 'चारित्रिक' गिरावट के मामले में कोई समझौता नहीं होगा। पिछले एक महीने से इस विवाद के कारण पार्टी की हो रही फजीहत से संगठन के शीर्ष नेता काफी नाराज हैं।

अंदरूनी गुटबाजी और लॉबिंग तेज

इस पूरे मामले के बीच संगठन में नए पदों की चाह रखने वाले नेताओं ने जयपुर से लेकर दिल्ली तक अपनी लॉबिंग तेज कर दी है। दूसरी ओर, तथाकथित कांड में फंसे पदाधिकारी खुद को 'फुल कॉन्फिडेंट' दिखा रहे हैं और चुप्पी साधे हुए हैं। वहीं, पार्टी का ही एक दूसरा गुट लगातार इस मामले को हवा दे रहा है ताकि दबाव बना रहे। उनका आरोप है कि रसूख के चलते पुलिस ने आरोपियों के साथ मिलकर अहम सबूतों को नष्ट कर दिया है। फिलहाल, भाजपा के बड़े नेताओं को इस मामले पर 'मौन' रहने की हिदायत दी गई है।

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