वित्त विभाग के आदेश से 5 हजार से ज्यादा शिक्षक असमंजस में, 100 करोड़ की वसूली की तैयारी

वित्त विभाग के आदेश से 5 हजार से ज्यादा शिक्षक असमंजस में, 100 करोड़ की वसूली की तैयारी
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जयपुर।

प्रदेश के पांच हजार से अधिक शिक्षक इन दिनों वित्त विभाग के एक आदेश को लेकर गहरे असमंजस और चिंता में हैं। शिक्षा विभाग की ओर से बिना पद सृजित किए ही इन शिक्षकों को शहरी क्षेत्र के स्कूलों में पोस्टिंग दे दी गई थी, जबकि उनका वेतन ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में खाली पड़े पदों से जारी किया जाता रहा। अब वित्त विभाग ने शहरी क्षेत्र में दिए गए मकान किराया भत्ता और शहरी क्षतिपूर्ति भत्ता को गलत बताते हुए वसूली के आदेश जारी कर दिए हैं।

इस आदेश के बाद करीब पांच हजार शिक्षकों से लगभग 100 करोड़ रुपए की वसूली की तैयारी की जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि उन्हें पोस्टिंग शिक्षा विभाग ने दी थी और वेतन भुगतान की जिम्मेदारी भी विभाग की ही थी। ऐसे में इसमें उनकी कोई गलती नहीं है। वित्त विभाग के आदेश के चलते इन शिक्षकों का पिछले तीन महीनों से वेतन भी अटका हुआ है, जिससे आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।

वित्त विभाग के आदेश के अनुसार जिन शिक्षकों का वेतन ग्रामीण क्षेत्र के खाली पदों से उठाया गया है, उन्हें शहरी क्षेत्र का मकान किराया भत्ता और शहरी क्षतिपूर्ति भत्ता नहीं दिया जा सकता। यदि अप्रैल 2023 के बाद किसी शिक्षक को यह भुगतान किया गया है तो उसकी वसूली की जाएगी। अनुमान है कि प्रत्येक शिक्षक से करीब एक लाख 75 हजार से लेकर दो लाख रुपए तक की वसूली हो सकती है। कुल वसूली की राशि लगभग 100 करोड़ रुपए के आसपास बताई जा रही है।

राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय ने इस मामले को शिक्षा सचिव के समक्ष उठाया है। संघ के प्रदेश महामंत्री महेंद्र लखारा और अतिरिक्त महामंत्री बसंत जिंदल का कहना है कि वित्त विभाग के आदेश से शिक्षकों में भारी रोष है और इसे अन्यायपूर्ण बताया जा रहा है।

यह पूरा मामला पिछली सरकार के समय का है। उस दौरान चयन के बाद इन शिक्षकों को काउंसलिंग के जरिए महात्मा गांधी स्कूलों में स्थायी पोस्टिंग दी गई थी। तब शिक्षा विभाग की ओर से यह आश्वासन दिया गया था कि संबंधित स्कूलों में शिक्षकों के पद सृजित किए जाएंगे। लेकिन आज तक पद सृजित नहीं हो पाए हैं और शिक्षकों का वेतन अब भी दूसरे स्कूलों के पदों से उठाया जा रहा है।

शिक्षकों का कहना है कि पद सृजित करना शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है। वे शहरी क्षेत्र में सेवाएं दे रहे हैं, इसलिए उन्हें शहरी क्षेत्र के अनुसार मकान किराया भत्ता और शहरी क्षतिपूर्ति भत्ता मिला। वेतन भुगतान विभाग का दायित्व है, ऐसे में अब वसूली का बोझ शिक्षकों पर डालना पूरी तरह अनुचित है। वित्त विभाग के आदेश ने इन शिक्षकों की नींद उड़ा दी है और वे समाधान की मांग कर रहे हैं।

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