कॉपीराइट उल्लंघन मामला: राजस्थान के 5 प्रमुख प्रकाशकों और 9 पुस्तक विक्रेताओं पर प्रसंज्ञान

भरतपुर/भीलवाड़ा। राजस्थान के भरतपुर की एक अदालत ने कॉपीराइट एक्ट 1957 के आठ साल पुराने एक गंभीर मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय विशिष्ट अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (पीसीपीडीटी एक्ट केसेज) ने पुलिस द्वारा पेश की गई अंतिम रिपोर्ट (एफआर) को खारिज करते हुए प्रदेश के पांच नामचीन प्रकाशकों और भरतपुर-धौलपुर के नौ पुस्तक विक्रेताओं के खिलाफ धारा 63 के तहत प्रसंज्ञान लिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय के शिक्षा पाठ्यक्रम में शामिल ऐतिहासिक पुस्तक "वीर शिरोमणि महाराजा सूरजमल ऐतिहासिक नाटक" से जुड़ा है। इस पुस्तक के लेखक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कुंवर पुष्कर सिंह हैं। पुस्तक के संपादक महेंद्र सिंह सिकरवार ने 15 अक्टूबर 2018 को भरतपुर के मथुरा गेट थाने में मामला दर्ज कराया था।
आरोप है कि इन प्रकाशकों ने बिना किसी अनुमति के इस ऐतिहासिक नाटक की मूल भाषा और अंशों को अपनी 'पासबुक' और 'वन वीक सीरीज' में अवैध रूप से प्रकाशित और मुद्रित किया। इसके बाद भरतपुर और धौलपुर के पुस्तक विक्रेताओं के साथ मिलीभगत कर इसे बाजार में धड़ल्ले से बेचा गया।
इन प्रकाशकों और विक्रेताओं पर गिजी गाज
विधि सूत्रों के अनुसार, न्यायालय ने निम्नलिखित के खिलाफ प्रसंज्ञान लिया है:
* संजीव प्रकाशन जयपुर: प्रदीप मित्तल और चंद्रेश सिंघल।
* बृज वनवीक सीरीज: छवि पब्लिकेशंस, जयपुर।
* स्टैंडर्ड वनवीक सीरीज: राजवर्धन जैन (राज प्रकाशन मंदिर, जयपुर)।
* राजा वन वीक सीरीज: राजकुमार गट्टानी (न्यू बुक कंपनी, जयपुर)।
* सुपर वनवीक सीरीज: राजवर्धन जैन (राजस्थान बुक डिस्ट्रीब्यूटर्स, जयपुर)।
साथ ही भरतपुर के गर्ग बुक डिपो, सुनील बुक डिपो, पवन बुक सेंटर, दिनेश बुक डिपो, बंसल बुक डिपो, बंसल बुक सेंटर, पप्पू मैगजीन और धौलपुर के सिंगल व भारत बुक डिपो के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 18 मई को मुकर्रर की गई है।
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