कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के चारों ओर ईको सेंसिटिव जोन घोषित, 94 गांवों में खनन और उद्योगों पर रोक

कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के चारों ओर ईको सेंसिटिव जोन घोषित, 94 गांवों में खनन और उद्योगों पर रोक
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने अरावली पर्वतमाला में स्थित कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के चारों ओर शून्य से एक किलोमीटर तक के क्षेत्र को पारिस्थितिकी संवेदी क्षेत्र घोषित कर दिया है। इस संबंध में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से अधिसूचना जारी की गई है।

नई अधिसूचना के तहत अभयारण्य की सीमा से सटे करीब 243 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में आने वाले 94 गांवों में खनन गतिविधियों, बड़े औद्योगिक उपक्रमों, ईंट भट्टों और नए होटल व रिसॉर्ट्स पर सख्त प्रतिबंध लागू होंगे। सरकार का उद्देश्य इस क्षेत्र में अनियंत्रित विकास पर रोक लगाकर प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखना है।

अधिसूचना के अनुसार कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य राजसमंद, पाली और उदयपुर जिलों में फैला हुआ है। यह क्षेत्र अरावली के सबसे संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्रों में शामिल माना जाता है। साथ ही यह बनास और लूणी नदी प्रणालियों का महत्वपूर्ण जलग्रहण क्षेत्र भी है, जिससे आसपास के इलाकों की जल सुरक्षा जुड़ी हुई है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि ईको सेंसिटिव जोन में नए प्रदूषणकारी उद्योग, वाणिज्यिक खनन, पत्थर उत्खनन, ईंट भट्टों की स्थापना और पवन चक्कियों जैसे प्रोजेक्ट्स की अनुमति नहीं दी जाएगी। इन प्रतिबंधों का मुख्य उद्देश्य अभयारण्य और उसके आसपास की जैव विविधता, वनस्पतियों और वन्यजीवों का संरक्षण सुनिश्चित करना है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से कुंभलगढ़ क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत को बचाने में मदद मिलेगी और भविष्य में वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास बना रहेगा।

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