चंद्रबाबू नायडू सबसे अमीर cm: ममता के पास सिर्फ 15 लाख: भजनलाल ने मुख्यमंत्रियों की संपत्ति पर ADR रिपोर्ट को लेकर पारदर्शिता और जनसेवा पर दिया जोर

जयपुर: एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच (NEW) द्वारा जारी हालिया रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए, राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा ने सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और नेताओं की जवाबदेही के महत्व को रेखांकित किया। यह रिपोर्ट देश के मुख्यमंत्रियों की संपत्ति का विश्लेषण करती है, जिसमें आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को ₹931 करोड़ से अधिक की संपत्ति के साथ सबसे अमीर मुख्यमंत्री बताया गया है।
एडीआर की रिपोर्ट, जो 27 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के चुनावी हलफनामों पर आधारित है, देश के 30 मुख्यमंत्रियों की कुल संपत्ति ₹1632 करोड़ बताती है। इसमें से लगभग 57% हिस्सा अकेले चंद्रबाबू नायडू का है, जिनकी चल संपत्ति ₹810 करोड़ और अचल संपत्ति ₹121 करोड़ है। वहीं, उन पर ₹10 करोड़ की देनदारी भी है।
इस सूची के दूसरे छोर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं, जिनकी कुल संपत्ति मात्र ₹15.38 लाख है और उनके पास कोई अचल संपत्ति नहीं है। यह आंकड़ा सार्वजनिक जीवन में सादगी का एक उदाहरण प्रस्तुत करता है।रिपोर्ट में अन्य मुख्यमंत्रियों का भी जिक्र है। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ₹332 करोड़ की संपत्ति के साथ दूसरे सबसे अमीर मुख्यमंत्री हैं, हालांकि उन पर ₹180 करोड़ से अधिक की सर्वाधिक देनदारी भी है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ₹51 करोड़ की संपत्ति के साथ तीसरे स्थान पर हैं।मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के अपने नवीनतम चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति ₹1.46 करोड़ है, जिसमें ₹43.62 लाख की चल और ₹1.03 करोड़ की अचल संपत्ति शामिल है। उन पर ₹31.52 लाख की देनदारी भी है।इस संदर्भ में, मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े सूत्रों ने कहा कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा का मानना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि की संपत्ति का ब्योरा जनता के सामने स्पष्ट होना चाहिए। उनका कहना है कि राजनीति व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि जनसेवा का एक माध्यम है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नेताओं को अपनी वित्तीय स्थिति के बारे में पूरी तरह से पारदर्शी होना चाहिए ताकि जनता का उन पर विश्वास बना रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी प्राथमिकता राजस्थान के विकास और प्रदेशवासियों का कल्याण है, न कि व्यक्तिगत संपत्ति का संग्रह।यह रिपोर्ट एक बार फिर इस बहस को सामने लाती है कि राजनीति में प्रवेश करने वाले नेताओं की संपत्ति में किस प्रकार और क्यों इतनी भारी भिन्नता देखने को मिलती है।
