बच्चों को नशीले पदार्थ बेचना दंडनीय अपराध - वृत्ताधिकारी गंगरार


चित्तौड़गढ़, । जिला पुलिस अधीक्षक सुधीर जोशी के निर्देशन में बाल संरक्षण विषयों पर व्यापक जागरूकता के लिए वृत्त स्तरीय जागरूकता कार्यक्रमों की श्रृंखला में आज गंगरार वृत्त के गंगरार पुलिस थाना क्षेत्र मे अंबेडकर चौराहे पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

वृत्ताधिकारी रामेश्वर लाल जी ने बताया कि वर्तमान परिवेश में किशोर एवं बालकों में नशावृति की रोकथाम में समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होने बताया कि किसी भी 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे को किसी भी प्रकार का मादक पदार्थ, शराब या अन्य मन स्वापक पदार्थ देना, प्रयोग करने के लिए प्रेरित करना, बेचना, परिवहन कराना भी अधिनियम की धारा 77 एवं 78 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होने पुलिस विभाग द्वारा जागरूकता के लिए यूनिसेफ के सहयोग से आयोजित किए जा रहे नुक्कड नाटक के माध्यम से दी जा रही जानकारी को अमल में लाने तथा किसी भी दुव्यर्वहार की स्थिति में प्रशासन व पुलिस को सूचना देने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में थानाधिकारी फूलचन्द्र टेलर ने बताया कि वर्तमान समय में बालकों में यातायात नियमों के उल्लंघन, साइबर अपराधों, नशावृति, बाल श्रम तथा बाल विवाह जैसी समस्याओं से सामुदायिक जागरूकता के माध्यम से ही रोक लगाई जा सकती है। उन्होने उपस्थित प्रतिभागियों से अपने आस-पास के क्षेत्र में बाल नशावृति, बाल श्रम, बाल विवाह जैसी घटनाओं की सूचना प्रशासन एवं पुलिस को देने तथा साइबर अपराधों के मामलों में हेल्पलाईन 1930 सहित साइबर पुलिस थाने पर त्वरित रूप से रिपोर्ट करने के लिए सुझाव दिए। कार्यक्रम के आयोजन में उदयपुर रेंज पुलिस और युनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में संचालित पुलिसिंग फॉर केयर ऑफ चिल्ड्रन कार्यक्रम अंतर्गत तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया गया।

यूनिसेफ की बाल संरक्षण सलाहकार सिन्धु बिनुजीत द्वारा रेंज पुलिस द्वारा बाल संरक्षण से संबंधित जागरूकता के लिए जिले में संचालित किए जा रहे अभियान के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए आमजन से बालकों में साइबर अपराधों से बचने, बाल नशावृति की रोकथाम तथा बाल श्रम एवं बाल विवाह जैसी कुरीतियों के विरूद्ध प्रशासन एवं पुलिस के सहयोग के लिए प्रेरित किया। उन्होने बताया गया कि किशोर न्याय अधिनियम के अनुसार 18 वर्ष से कम उम्र के बालक से किसी प्रकार का विधि विरूद्ध श्रम कराना, अधिनियम की धारा 79 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने बाल विवाह के दुष्प्रभावों के बारे में बताते हुए बाल विवाह की संभावना की सूचना पुलिस व प्रशासन को देने के लिए आग्रह किया।

आमजन और समुदाय पुलिसिंग सदस्यों द्वारा नुक्कड़ नाटक से ली सीख

कार्यक्रम आयोजन से पूर्व थाना क्षेत्र में पुलिस अधिकारियों द्वारा स्पीकर्स के माध्यम से आमजन को जागरूकता कार्यक्रम में आने के लिए आमंत्रित किया गया। कार्यक्रम के दौरान डूंगरपुर जिले के आसपुर से बहुमुखी सांस्कृतिक मंच के कमलेश बामनिया एवं टीम द्वारा नुक्कड नाटकों का मंचन किया गया जिनमें प्रथम नुक्कड़ नाटक में बाल श्रम एवं बाल विवाह के दुष्प्रभावों तथा रिपोर्ट करने के तरीकों के बारे में बताया गया। इसी प्रकार दूसरे नाटक में यातायात सुरक्षा और नशावृति की रोकथाम के लिए समाज की भूमिका और नशावृति के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी गई। नुक्कड़ नाटक के दौरान मुख्य कलाकार द्वारा यमराज की भूमिका में यातायात नियमों की अवहेलना करने वाले युवाओं को आमजन से समझाइश की गई। कार्यक्रम में गंगरार पुलिस थाना क्षेत्र के 250 से ज्यादा प्रतिभागी, पुलिस थाने के अधिकारीगण तथा कार्यक्रम के आकाश उपाध्याय आदि उपस्थित रहें।

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