बाल विवाह भारत की संस्कृति नहीं: उत्तम स्वामी

चित्तौड़गढ़, । बाल विवाह भारत देश की मूल संस्कृति नहीं रही है, बल्कि यह परंपरा उस दौर में शुरू हुई जब सामाजिक और ऐतिहासिक परिस्थितियों के कारण बहनों और बेटियों की अस्मिता की रक्षा करना आवश्यक हो गया था। वर्तमान समय में देश की परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं और अब बाल विवाह जैसी कुरीति को समाप्त करने का समय आ गया है।
यह विचार पूज्य उत्तम स्वामी महाराज ने चित्तौड़गढ़ में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा पांडाल में बाल विवाह निषेध जागरूकता अभियान के अंतर्गत पोस्टर विमोचन के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज देश की सीमाएं सुरक्षित हैं और हर नागरिक का स्वाभिमान और अस्मिता संरक्षित है। ऐसे अनुकूल वातावरण में बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को जड़ से समाप्त कर बेटियों को शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सर्वांगीण विकास के अवसर प्रदान करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
उत्तम स्वामी महाराज ने संत समाज की ओर से आह्वान करते हुए कहा कि बाल विवाह मुक्त हिंदुस्तान के संकल्प को साकार करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को यह प्रण लेना होगा कि उसके गांव, मोहल्ले और आसपास के क्षेत्र में कोई भी बाल विवाह न हो।
भगवती सेवा एवं शिक्षण संस्थान के अध्यक्ष राम गोपाल ओझा ने जानकारी देते हुए बताया कि जिला कलेक्टर आलोक रंजन के निर्देशानुसार बाल अधिकारिता विभाग के सहयोग से बाल विवाह निषेध भारत के 100 दिवसीय अभियान के तहत यह पोस्टर विमोचन एवं संत आह्वान कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक सुरेश चंद्र, गजेन्द्र सिंह, चंद्रशेखर, त्रिलोक चंद्र, पूर्व विधायक बद्री लाल जाट, बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक ओमप्रकाश तोषनीवाल, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी प्रमोद दशोरा, सनातन गौरव समिति चित्तौड़गढ़ के संयोजक प्रवीण टांक, सहसंयोजक शैलेंद्र झंवर सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
