चित्तौड़गढ़ : 648 करोड़ की चंबल पेयजल परियोजना को मिली हरी झंडी, एलएंडटी को कार्यादेश जारी

चित्तौड़गढ़ : 648 करोड़ की चंबल पेयजल परियोजना को मिली हरी झंडी, एलएंडटी को कार्यादेश जारी
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चित्तौड़गढ़। चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र की वर्षों पुरानी पेयजल समस्या के स्थाई समाधान की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर स्थापित हुआ है। पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार में राज्यमंत्री रहे सुरेंद्र सिंह जाड़ावत के प्रयासों से स्वीकृत चंबल परियोजना अब धरातल पर उतरने जा रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए एलएंडटी (L&T) कंपनी को 636 करोड़ रुपये का कार्यादेश (Work Order) जारी कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि यह कंपनी वर्तमान में बेगू-भैंसरोड़गढ़ चंबल परियोजना का कार्य भी संभाल रही है।

साहाड़ा दौरे से उपजा था योजना का विचार

पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्र सिंह जाड़ावत ने बताया कि कांग्रेस सरकार के दौरान जब वे भीलवाड़ा के साहाड़ा में प्रभारी थे, तब उन्होंने वहां गांव-गांव में पानी का भारी संकट देखा था। उसी समय उन्होंने चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र की भावी जरूरतों को समझते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से चर्चा की और वर्ष 2021-22 में ही इस चंबल परियोजना की मंजूरी दिलवाई थी। सरकार बदलने के बावजूद जाड़ावत लगातार विभाग के उच्च अधिकारियों, पूर्व मुख्य अभियंता पीएचडी लुहाड़िया और दिनेश गोयल के संपर्क में रहे ताकि योजना ठंडे बस्ते में न जाए। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी समय-समय पर इस प्रोजेक्ट का फीडबैक लेते रहे।

छह बार टेंडर के बाद मिली सफलता

इस परियोजना की राह इतनी आसान नहीं थी। जाड़ावत ने बताया कि पूर्व में उच्च बीड (High Bid) और नेगोसिएशन सफल नहीं होने के कारण छह बार टेंडर प्रक्रिया निरस्त करनी पड़ी थी। आखिरकार अब कार्यादेश जारी होने से क्षेत्र की जनता में हर्ष की लहर है। यह योजना 'जल जीवन मिशन' के अंतर्गत ही पूर्ण की जाएगी, जिससे घर-घर नल से जल पहुंचेगा।

परियोजना का खाका: 278 गांव और शहर होंगे लाभान्वित

इस विशाल परियोजना के तहत चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र के 278 गांव, ढाणियां और मजरे शामिल हैं। इसके साथ ही चित्तौड़गढ़ शहर और निंबाहेड़ा के 66 गांवों को भी मीठा पानी मिलेगा।

बस्सी क्षेत्र: यहां उच्च जलाशय बनेगा जिसे राजगढ़ से कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे घाटा क्षेत्र और आसपास के गांवों की प्यास बुझेगी।

सेमलपुरा: यहां सबसे बड़ा उच्च जलाशय बनाया जाएगा, जिससे चित्तौड़गढ़ शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति होगी।

कन्नौज व पांडोली: कन्नौज के जलाशय से भदेसर क्षेत्र और पांडोली के जलाशय से आसपास की पंचायतों को जोड़ा जाएगा।

बड़ा निवेश: प्रत्येक ग्राम पंचायत में औसतन 18 से 20 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जबकि बस्सी और सावा जैसी बड़ी पंचायतों में यह बजट 30 से 50 करोड़ रुपये तक होगा।

50 वर्षों तक की समस्या का अंत

सुरेंद्र सिंह जाड़ावत ने कहा कि इस परियोजना के पूर्ण होते ही आगामी 50 वर्षों तक क्षेत्र में पेयजल का कोई संकट नहीं रहेगा। उन्होंने चित्तौड़गढ़ की जनता की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का आभार व्यक्त किया है।

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