चित्तौड़गढ़ में 108 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का समापन

चित्तौड़गढ़ में 108 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का समापन
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चित्तौड़गढ़ अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के मार्गदर्शन एवं गायत्री परिवार ट्रस्ट चित्तौड़गढ़ के नेतृत्व में गायत्री शक्ति पीठ में 5 से 8 फरवरी को आयोजित विराट 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ के अंतिम दिन कई संस्कारों के साथ दोपहर 2 बजे पूर्ण आहुति हुई एवं सभी देव शक्तियों का भवपूर्वक विसर्जन कर अतिथियों का विदाई समारोह नाम आँखों के साथ पूर्ण हुआ इससे पूर्व टोलीनायक आचार्य सुनील शर्मा के सानिध्य में समस्त यजमान मंडल ने वैदिक मंत्रों की अनुगूंज में सर्वतोभद्र मंडल पर स्थापित गणपति आदि देव पूजन गायत्री स्तवन कर गायत्री महायज्ञ में और गुरु दीक्षा, विवाह संस्कार, गर्भवती महिलाओं के पुंसवन संस्कार जैसे 800 संस्कार हुवे हजारों की संख्या मे यजमानों ने गायत्री महामंत्र एवं महामृत्युंजय मंत्र की आहुतियां समर्पित कर महायज्ञ को विराम दिया।

इस अवसर पर साधकों एवं श्रद्धालुओं को आहुतियां एवं उन्हें दीक्षित करते हुए आचार्य सुनील शर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति जिसे देव संस्कृति, ऋषि संस्कृति एवं वैदिक संस्कृति कहा जाता है, यह देव संस्कृति यज्ञ पर आधारित है इसीलिए भारतीय संस्कृति को यज्ञ संस्कृति कहते हैं, पुराणों में कहा गया है कि यज्ञ ही संपूर्ण विश्व की नाभि यानी मूलाधार है, द्रव्य के माध्यम से संपूर्ण सृष्टि का भरण पोषण करते हैं, ऐसा शतपथ महर्षि याज्ञवल्क्य ने कहा है, यज्ञ के माध्यम से पर्जन्य, प्राण, ऊर्जा उत्पन्न होता है जिसमें आसपास के समस्त वातावरण में नवीन ऊर्जा, नवीन चेतना का विकास होता है तथा उस क्षेत्र में धन- धान्य की वर्षा होती है, गायत्री यज्ञ को घर-घर पहुंचाने वाले पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का यज्ञोपवीत संस्कार महामना मदन मोहन मालवीय ने करते समय कहा था कि गायत्री मंत्र कामधेनु है जो संपूर्ण मानवीय चेतना का उत्कर्ष करती है जिससे मानसिक एवं शारीरिक समस्याओं का निदान होता है, आचार्य शर्मा ने कहा कि गायत्री मंत्र से सात्विकता आती है, विचारों से ही कर्म बनता है, विचार ठीक होंगे तो कर्म सुधरते चले जाएंगे, बुद्धि प्रदान करने वाला महामंत्र ही गायत्री महामंत्र है |

आयोजन समिति के सदस्य जगदीश चंद्र जोशी ने इस विराट आयोजन को सफल बनाने में शासन, प्रशासन और स्थानीय समाजसेवी संगठनों का महत्वपूर्ण योगदान रहा जिसमे निशुल्क कार्यक्रम स्थल उपलब्ध करवाने के लिए महेश ईनाणी और भोजनशाला के लिए खरडेश्वर महादेव मंदिर अध्यक्ष सुरेश डांगी जी का आभार व्यक्त करते हुवे विद्युत विभाग, टेंट व्यवस्था, लाइट, माइक, नगर परिषद, पुलिस प्रशासन, अग्निशमन विभाग, बाहर से पधारे कार्यकर्ता बंधु, यज्ञ शाला निर्माण करता रमेश जी उपाध्याय,पुष्कर से आये साहित्य स्टाल, कार्यक्रम मे आए सभी संत महात्माओं, पत्रकार, प्रोग्राम को डिजिटल रूप से पूरी दुनिया मे प्रसारित करने लिए सोशल मीडिया टीम धन्यवाद व्यक्त किया |

इस अवरसर पर रमेश चंद्र पुरोहित ने टोली नायक सुनील शर्मा, राम प्रताप, दिलधिर यादव, रणवीर सिंह नेगी, विवेक प्रताप सिंह, देवी सिंह का चित्तौड़गढ़ पधार कर कार्य क्रम को सफल बनाने एवं गुरु देव का संदेश जन जन तक पहुचने के लिए धन्यवाद दिया, एवं चित्तोडगढ़ शक्ति पीठ द्वारा आगामी दिनों मे किए जाने वाले कार्यकर्मों का विवरण दिया |

शांतिकुंज हरिद्वार के टोली नायक सुनील शर्मा ने भी इस आयोजन को अद्वितीय बताया कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी कार्यकर्ताओं का सम्मान किया एवं परम वंदनीय माता जी के जन्म शताब्दी वर्ष हेतु दिशा निर्देश दिए |

डॉ योगेश व्यास ने बताया कि यज्ञ के अंतिम दिन पाँच विद्यारंभ संस्कार, तीन यज्ञोपवीत संस्कार, पांच नामकरण संस्कार, छह पुंसवन संस्कार तथा चार अन्नप्राशन संस्कार हुए | किरण यादव ने बताया की प्रति माह की 9- 18- 21 तारीख को चित्तौड़गढ़ के श्री सावलिया जी सरकारी सामान्य चिकित्सालय मे निशुक पुंसवन संस्कार करवाए जाते है | महेश ईनाणी, केदार वैष्णव, जगदीश जोशी ने परम पूज्य गुरु देव के साथ अपने अनुभवों को साझा किया बता दें कि आयोजन की शुरुआत कलश यात्रा से हुई, जिसने आसपास के क्षेत्रों में गूंजती ध्वनियों के बीच अपनी दिव्य गंध फैलाई और श्रद्धालुओं को विश्व के नव निर्माण के भागीदार बनने का आह्वान किया, चित्तौड़गढ़ जिले के 30 गांवों में प्रचार प्रसार के साथ-साथ 50 दीपयज्ञ और हर घर में पीले चावल पहुंचाकर कार्यकर्ताओं ने घर-घर गायत्री और यज्ञ का संदेश फैलाया |

अंतिम दिन के कार्यक्रम में विशेष रूप से श्री महेश ईनाणी, डॉ. प्रवीण शर्मा और डॉ वंदना शर्मा, सुशील शर्मा, मुरली धर अहीर, महेंद्र पालीवाल, वीरेंद्र सिंह भाटी, डॉ. स्नेह लता पालीवाल, रमेश उपाध्याय, गोवर्धन धाकड़, दीपमाला, बाल किशन माली, राजेन्द्र सोनी, मदन लाल शर्मा, रमेश टेलर, मदन लाल शर्मा, शीश राम यादव, रामेश्वर गर्ग, रमेश पुरोहित, मदन टेलर, शंकर लाल, अमृत लाल चंगेरिया, राम चंद्र कुमावत, उपस्थित, रहे |

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